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Saturday, July 27, 2019

गोरखपुर : जूनियर विद्यालयों के 80 शिक्षकों को छोड़ना होगा ब्लॉक


जिले में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शुक्रवार को सभी तहसील मुख्यालयों पर ब्लॉक स्तरीय समायोजन किया गया। प्राथमिक विद्यालयों में सभी शिक्षक ब्लॉक के भीतर समायोजित हो गए, जबकि उच्च प्राथमिक विद्यालय में 102 शिक्षकों को ब्लॉक के भीतर समायोजित किया गया।
इनमें शहर के निकट के ब्लॉक चरगांवा में नौ, खोराबार में 17 व भटहट में सात शिक्षकों का समायोजन किया गया। अब यह तय हो गया है कि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 80 शिक्षकों को ब्लॉक से बाहर जाना होगा।
शुक्रवार सुबह से ही तहसील मुख्यालयों के ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर अलग-अलग ब्लॉकों की काउंसिलिंग शुरू हुई। एसडीएम की अगुवाई में हर ब्लॉक की काउंसिलिंग कराई गई। नगर संसाधन केंद्र गोरखपुर में नगर, पिपरौली व खोराबार की काउंसिलिंग हुई। शिक्षकों के समायोजन के बाद हर ब्लॉक से सरप्लस शिक्षकों की सूची भेज दी गई और जिला स्तर पर उनकी वरिष्ठता का निर्धारण भी कर दिया गया है।
  • ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों के समायोजन के लिए पूरी हुई काउंसिलिंग
  • उच्च प्राथमिक विद्यालय के 102 व प्राथमिक के सभी शिक्षक ब्लॉक में ही हुए समायोजित

80 शिक्षक सरप्लस, करीब 700 हैं रिक्त पद

जूनियर विद्यालयों में 80 शिक्षक सरप्लस हुए हैं और उनकी वरिष्ठता सूची जारी कर दी गई है। इस सूची पर 27 जुलाई को दोपहर 12 बजे तक आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। इन 80 पदों के सापेक्ष जिले में करीब 700 पद रिक्त हैं। जंगल कौड़िया में नौ, सहजनवां में 90, ब्रrापुर में 38, पिपरौली में चार, सरदारनगर में 17, पिपराइच में 19 व खजनी में 15 शिक्षक समायोजित हो सकेंगे।

ब्लॉक स्तर पर समायोजन शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हो गया है। जिले स्तर की वरिष्ठता सूची जारी कर दी गई है, जिसपर शनिवार दोपहर तक आपत्तियां की जा सकेंगी- भूपेंद्र नारायण सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी


Wednesday, July 24, 2019

गोरखपुर : दूसरे के पैन कार्ड पर निकाल रहा वेतन

  • गोरखपुर की शिक्षिका के पैन कार्ड पर बलरामपुर में निकल रहा वेतन
  • महिला शिक्षक ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से की शिकायत
  • महिला शिक्षक ने उनके पैन कार्ड का बलरामपुर में उपयोग होने की शिकायत की है। मामले की जांच कराई जाएगी। - भूपेंद्र नारायण सिंहजिला बेसिक शिक्षा अधिकारी


बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी शिक्षकों की जांच के बीच एक और मामला प्रकाश में आया है। पिपरौली ब्लॉक की एक महिला शिक्षक ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में लिखित शिकायत की है कि उनके पैन कार्ड पर बलरामपुर बेसिक शिक्षा कार्यालय से कोई वेतन प्राप्त कर रहा है। संदेह जताया जा रहा है कि बलरामपुर में कोई फर्जी तरीके से नौकरी कर रहा है, जिसमें महिला शिक्षक के शैक्षणिक प्रपत्रों का प्रयोग किया गया है।
पिपरौली क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय नंदापार की प्रधानाध्यापक अर्चना पांडेय एक जुलाई 2010 से इस पद पर कार्यरत हैं। उनकी प्रथम नियुक्ति चार जनवरी 2006 को गोला क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय बेवरी में सहायक अध्यापक के पद पर हुई थी। अपने पत्र में अर्चना ने बताया कि जब उन्होंने आइटीआर दाखिल करने के लिए टीडीएस भरा तो यह बात पता चली कि उनके पैन कार्ड (एवीपीपीपी0158ए) नंबर से किसी अन्य व्यक्ति का वेतन भी निकल रहा है। यह व्यक्ति जिला बेसिक शिक्षा परिषद बलरामपुर में कार्यरत है। माना जा रहा है कि बलरामपुर में कार्यरत व्यक्ति ने पहले ही आइटीआर दाखिल कर दिया होगा, जिससे यह मामला प्रकाश में आ गया। विभाग इस मामले में पत्र बलरामपुर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजकर जांच के लिए कहेगा।
प्रकाश में आ चुके हैं दूसरे के पैन कार्ड पर नौकरी के मामले: दूसरे के पैन कार्ड पर नौकरी करने के दर्जन भर से अधिक मामले प्रकाश में आ चुके हैं। दूसरे जिलों में कार्यरत शिक्षक के नाम पर गोरखपुर में वेतन निकलने की कई शिकायतें हुई थीं। जांच में शिकायतकर्ता सही मिले थे और दूसरा व्यक्ति फर्जी। गोरखपुर में कई पर बर्खास्तगी की कार्रवाई भी हो चुकी है।

गोरखपुर : एक अधिकारी ने दी मान्यता दूसरे ने खोल दी पोल


सीमेंट शेड में मिला विद्यालय, दे दी गई थी पक्के भवन की रिपोर्ट
अमान्य विद्यालयों की जांच के दौरान सामने आया मामला
बेसिक शिक्षा विभाग में मान्यता को लेकर होने वाले खेल का सच उजागर हुआ है। भटहट क्षेत्र में तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट पर एक विद्यालय को एक जुलाई 2018 से नर्सरी से कक्षा आठ तक अंग्रेजी माध्यम की मान्यता प्रदान कर दी गई लेकिन इधर जब अमान्य विद्यालयों की जांच शुरू हुई तो भेद खुल गया। वर्तमान खंड शिक्षा अधिकारी ने जो रिपोर्ट दी है, उसके मुताबिक पहले जो मान्यता दी गई थी वह गलत रिपोर्ट के आधार पर थी। मामला जांच के लिए अब बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र नारायण सिंह के पास है। उन्होंने कहा कि मामला गंभीर है। जांच कराकर मान्यता समाप्त की जाएगी।
10 कमरों का पक्का भवन दिखाकर दी गई थी मान्यता: तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी ने वंडरलैंड एकेडमी गुलरिहा बाजार के लिए रिपेार्ट दी थी कि विद्यालय का परिसर 6000 वर्गफीट है और 2480 वर्गफीट में निर्माण हुआ है। 3520 वर्गफीट क्रीड़ा स्थल है। कक्षाओं के लिए 10 कमरे हैं। प्रधानाध्यापक कक्ष, कार्यालय कक्ष, भंडारण के लिए कक्ष उपलब्ध है। बालक व बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय हैं। मिड डे मील के लिए रसोईघर है। पर, वर्तमान खंड शिक्षा अधिकारी रामाश्रय ने विद्यालय को मान्यता के मानक पर खरा नहीं पाया और स्कूल बंद करने की नोटिस दे दी। जांच में यह स्कूल मान्यता के लिए दिखाई गई जगह से काफी दूर सीमेंट शेड के छोटे-छोटे कमरों में संचालित होता पाया गया। जिस जमीन व भवन पर मान्यता ली गई, वह खंडहर नजर आता है। वहां जाने का रास्ता भी नहीं है। मौके पर स्कूल किसी भी स्तर से मान्यता के लायक नहीं मिला है। उसको दिया गया मान्यता प्रमाण पत्र संदिग्ध है।

नर्सरी से कक्षा आठ तक मान्यता के लिए क्या है जरूरी

  • शिक्षण कार्य के लिए न्यूनतम 180 वर्गफीट के 10 पक्के कमरे
  • तीन अतिरिक्त पक्के कक्ष
  • विद्यालय जाने का सुगम रास्ता
  • शौचालय
  • पेयजल की व्यवस्था

गोरखपुर : 30 तक पूरी की जाएगी शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया


विद्यालय के जूनियर अध्यापक को किया जाएगा समायोजित
कई दिनों के प्रयास के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने समायोजन की अंतिम कार्ययोजना तैयार कर ली है। मंगलवार को समायोजन की समयसारिणी व नियमों को सार्वजनिक किया गया। 30 जुलाई तक इस प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शासन की ओर से यह प्रक्रिया 15 जुलाई तक पूरा करने को कहा गया है। समायोजन में विद्यालय के जूनियर अध्यापक को ही हटना होगा।
कार्यवाही सबसे पहले ब्लॉक स्तर पर की जाएगी। मानक से अधिक शिक्षकों वाले विद्यालय से मानक से कम शिक्षकों वाले विद्यालय पर तैनाती की जाएगी। यदि किसी विद्यालय में पहले से प्रधानाध्यापक कार्यरत हैं और आरटीई मानक के अनुसार प्रधानाध्यापक का पद स्वीकृत नहीं है तो भी प्रधानाध्यापक को नहीं हटाया जाएगा। प्राथमिक विद्यालय में 60 छात्रों तक न्यूनतम दो व जूनियर विद्यालय में विषयवार न्यूनतम तीन शिक्षक रहेंगे।
31 मार्च 2020 को सेवानिवृत्त होने वाले अध्यापकों को उनके विद्यालयों से नहीं हटाया जाएगा। जिन विद्यालयों में छात्रओं का नामांकन अधिक है, वहां महिला शिक्षक की तैनाती अनिवार्य रूप से की जाएगी। जिला समिति की ओर से समायोजन में दिव्यांग एवं सेना में कार्यरत जवान की प}ी या पति को वरीयता दी जाएगी। असाध्य रोग से ग्रसित महिला शिक्षक को समायोजन में उनकी सुविधानुसार यथासंभव उसी ब्लॉक में तैनाती दी जाएगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि घोषित समय सारिणी के अनुसार समायोजन की कार्यवाही पूरी कर ली जाएगी।

समायोजन में कब क्या होगा


  • 23 जुलाई को ब्लॉक स्तर पर सरप्लस अध्यापकों की वरिष्ठता निर्धारण कर रिक्त विद्यालयों की सूची का प्रकाशन।
  • 24 जुलाई को ब्लॉक स्तर पर शिक्षक दर्ज करा सकेंगे आपत्ति।
  • 25 जुलाई को खंड शिक्षा अधिकारी ब्लॉक स्तर पर करेंगे आपत्तियों का निस्तारण। साथ ही पारस्परिक समायोजन के लिए आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि है।
  • 26 जुलाई को ब्लॉक स्तर पर पूरी की जाएगी समायोजन की कार्यवाही। उसी दिन शाम को जिले को सरप्लस शिक्षकों की वरिष्ठता सूची व विद्यालयों में रिक्त पदों की सूची सौंपनी होगी।
  • 27 जुलाई को जिला स्तर पर आपत्ति प्राप्त कर निस्तारित की जाएगी।
  • 29 जुलाई को जिला मुख्यालय पर समायोजन की कार्यवाही पूरी की जाएगी।
  • 30 जुलाई को जिलाधिकारी से अनुमोदन प्राप्त किया जाएगा।

Tuesday, July 16, 2019

गोरखपुर : दूसरी सूची में बढ़ जाएंगे सरप्लस शिक्षक

  •  छात्रों की संख्या के आधार पर तैयार हो रही एक और सूची
  •  मार्च 2019 में एमडीएम के लाभार्थियों की औसत संख्या पर हो रहा पद निर्धारण
  • शासन के निर्देशों के अनुसार पद निर्धारण का काम किया जा रहा है। जिलाधिकारी की सहमति से सूची जारी की जाएगी। समायोजन की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी होगी -भूपेंद्र नारायण सिंह, बीएसए

बेसिक शिक्षा के शिक्षकों का समायोजन विभाग के लिए चुनौती बनता जा रहा है। जिले में 30 सितंबर 2018 की छात्र नामांकन संख्या के आधार पर तैयार सूची को जिलाधिकारी का अनुमोदन नहीं मिल सका है और इसी बीच छात्रों की वास्तविक उपस्थित संख्या के आधार पर दूसरी सूची तैयार होने लगी है। पहली सूची में 79 शिक्षकों को ब्लॉक से बाहर जाने के लिए चिह्न्ति किया गया था, जबकि दूसरी सूची में इस संख्या में काफी इजाफा होने की संभावना है।
अपर मुख्य सचिव ने समायोजन को लेकर जारी दिशा-निर्देश में विद्यालयों पर शिक्षकों के पद निर्धारण के लिए नामांकन एवं नामांकन के सापेक्ष उपस्थित छात्रों की वास्तविक संख्या को आधार बनाया था। जिले में पहले नामांकित कुल छात्रों की संख्या के आधार पर पद निर्धारण कर दिया गया लेकिन वास्तविक छात्र संख्या का मामला जोर पकड़ने के बाद एक और सूची तैयार की जा रही है। वास्तविक संख्या के लिए मार्च 2019 में एमडीएम के लाभार्थियों की औसत संख्या को आधार बनाया जा रहा है।
आमतौर पर कुल नामांकित छात्रों की संख्या की तुलना में एमडीएम के लाभार्थियों की संख्या कम होती है। इस स्थिति में ब्लॉक से बाहर जाने वाले छात्रों की संख्या में इजाफा होने की संभावना है। रविवार को दूसरी सूची को अंतिम रूप देने की कोशिश जारी रही। अब जिलाधिकारी जिस सूची को अनुमोदित करेंगे, उसी के आधार पर समायोजन होगा, लेकिन दो सूचियों की स्थिति में आपत्तियां भी अधिक आने का अनुमान है।

Wednesday, July 10, 2019

गोरखपुर : पद के बराबर भी नहीं मिले अंग्रेजी माध्यम शिक्षकों के आवेदन


बेसिक शिक्षा विभाग में अंग्रेजी माध्यम के शिक्षकों के चयन के लिए 17 जुलाई को परीक्षा कराने की तैयारी है, लेकिन पर्याप्त संख्या में शिक्षकों को इन विद्यालयों पर समायोजित करना आसान नहीं होगा। एक हजार से अधिक पदों पर शिक्षकों को समायोजित करना है और करीब 900 आवेदन ही आए हैं।
200 नए विद्यालयों में होनी है अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई : जिले में फिलहाल 102 प्राथमिक विद्यालय अंग्रेजी माध्यम से संचालित हो रहे हैं। इस साल करीब 200 और विद्यालयों की चयन इस श्रेणी में किया गया है। आरटीई के नए नियमों के अनुसार प्रधानाध्यापक के पदों में कटौती के बाद भी हर विद्यालय में कम से कम चार सहायक अध्यापक की जरूरत होगी। अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने की कोशिश भी होगी। प्राथमिक के अलावा 23 उच्च प्राथमिक विद्यालयों को भी अंग्रेजी माध्यम के रूप में चयनित किया गया है। इन विद्यालयों में भी शिक्षकों को समायोजित करना है।
गत वर्ष हुए चयन में शिक्षकों को ब्लॉक के भीतर ही समायोजित किया गया था। ऐसे में कई शिक्षकों ने नए विद्यालयों पर ज्वाइन नहीं किया। इस बार भी ब्लॉक बदले जाने की कोई संभावना नजर न आने की स्थिति में शिक्षकों ने आवेदन करने में रुचि नहीं ली। उनका कहना है कि परीक्षा में अच्छे अंक पाकर भी दूर के ब्लॉकों में ही रहना है तो अंग्रेजी माध्यम में जाने का क्या फायदा।

गोरखपुर : स्कूलों को मिला नामांकन से 10 फीसद कम ड्रेस का पैसा


परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक सभी विद्यार्थियों को निश्शुल्क ड्रेस नहीं दे पा रहे हैं। विभाग की ओर से हर विद्यालय को नामांकित छात्र संख्या में 10 फीसद की कटौती के साथ बजट दिया जा रहा है। ऐसे में शिक्षकों के सामने सभी बच्चों को ड्रेस दे पाने की चुनौती खड़ी हो गई है। शिक्षकों ने यह बात शिक्षक संघ के माध्यम से बीएसए तक पहुंचाई है।
सितंबर 2018 की छात्र संख्या के आधार पर ड्रेस का पैसा जनपद को मिला है। विभाग से इस छात्र संख्या में 10 फीसद की कटौती की गई है। एक स्कूल में सितंबर 2018 में छात्र संख्या 30 थी। 10 फीसद कटौती के साथ 27 बच्चों के ड्रेस की प्रथम किश्त भेजी गई। वर्तमान छात्र संख्या 46 हो चुकी है, ऐसे में 19 बच्चों को ड्रेस देना शिक्षकों के लिए चुनौती है। विभाग की ओर से पुरानी छात्र संख्या को आधार बनाया गया और अप्रैल महीने से ही नए सत्र में नया नामांकन हो रहा है। हर स्कूल में कुछ न कुछ नामांकन हो चुका है। कई स्कूलों में नामांकन काफी बेहतर है। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष ज्ञानेंद्र ओझा का कहना है हर विद्यालय में छात्रों नामांकन से कम ड्रेस का पैसा भेजा गया है। ऐसे में कई बच्चे ड्रेस पाने से वंचित हो जाएंगे। उनके अभिभावकों के सवालों का जवाब भी शिक्षकों के पास नहीं है। इस बारे में बीएसए से वार्ता की गई है। बीएसए भूपेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि यू डायस पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार बजट आया था। बजट कुछ कम होने के कारण कटौती की गई है, जैसे ही और बजट आएगा, उसे स्कूलों को भेज दिया जाएगा। कोई भी बच्चा बिना ड्रेस के नहीं रहेगा।

Tuesday, July 9, 2019

गोरखपुर : बिना मान्यता के प्ले-वे पर टेढ़ी हुई बेसिक शिक्षा विभाग की नजर


जिले में बिना मान्यता के संचालित प्ले-वे पर शिक्षा विभाग की नजर टेढ़ी है। बेसिक शिक्षा विभाग की टीम जल्द ही प्ले-वे के खिलाफ सघन अभियान चलाएगी। अभी तक किसी भी प्ले-वे की ओर से मान्यता से जुड़े प्रपत्र विभाग में प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
शहर में धड़ल्ले से प्ले-वे का संचालन किया जा रहा है। कई स्कूलों ने भी अपने यहां छोटे बच्चों के लिए प्ले-वे खोला है। तीन वर्ष तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए मोटी फीस भी ली जाती है। संचालकों का दावा होता है कि उनके पास मान्यता है, लेकिन विभाग ने जब भी पूछा, वे मान्यता का कोई प्रपत्र नहीं दिखा पाए। हर बार उनकी ओर से फ्रेंचाइजी के लिए जारी पत्र ही प्रस्तुत किया जाता है, जिसे विभाग नहीं मानता।

केवल प्ले-वे की मान्यता का प्रावधान नहीं

दरअसल शिक्षा विभाग या तो नर्सरी से कक्षा आठ तक या कक्षा एक से आठ तक या पांच तक की मान्यता देता है। केवल प्ले-वे की मान्यता का कोई प्रावधान नहीं है। गत वर्ष विभाग ने दो दर्जन से अधिक प्ले-वे को नोटिस दी गई थी। कुछ ने फ्रेंचाइजी होने की बात कही, लेकिन किसी भी सरकारी संस्था से जारी मान्यता प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर सके। बीएसए ने बताया कि बिना मान्यता के कोई भी विद्यालय संचालित नहीं होने पाएगा। प्ले-वे के बारे में विभाग को कोई जानकारी नहीं। जांच कराई जाएगी, जिसके पास मान्यता का प्रपत्र नहीं होगा, उसे बंद कराया जाएगा।

गोरखपुर : पढ़ाई की कमान संभालेंगे सेवानिवृत्त शिक्षक


शिक्षकों की कमी के कारण विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। नियमित शिक्षक की नियुक्ति तक सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षक पढ़ाई की कमान संभालेंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक ने जिले के राजकीय एवं एडेड विद्यालयों के प्रधानाचार्यो से उनके यहां रिक्त पदों की सूचना मांगी है। 16 जुलाई तक सूचना उपलब्ध करानी होगी। प्रवक्ता के पद पर नियुक्त सेवानिवृत्त शिक्षक को 20 हजार रुपये तथा सहायक अध्यापक को 15 हजार रुपये मानदेय प्रदान किया जाएगा। प्रवक्ता या सहायक अध्यापक पद से सेवानिवृत्त हो चुके ऐसे शिक्षक, जिनकी उम्र 70 वर्ष से कम हो, मानदेय पर अध्यापन के लिए आवेदन कर सकते हैं। जिन विद्यालयों में प्रवक्ता, शिक्षक की जरूरत होगी, वे जरूरत के अनुसार मांग पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भदौरिया ने बताया कि निर्धारित तिथि तक जो विद्यालय सूचना नहीं देंगे, मान लिया जाएगा कि उनके यहां शिक्षकों की कमी नहीं है।

गोरखपुर : सूचना ऑनलाइन करने से कतरा रहे 18 मदरसे


सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त व मान्यता प्राप्त विद्यालयों की हर सूचना ऑनलाइन करना सरकार की प्राथमिकता में है। यू डायस प्लस सॉफ्टवेयर के तहत सभी विद्यालयों को सूचनाएं अपलोड करने का निर्देश दिया गया है, लेकिन इस कार्य में विद्यालयों की लापरवाही उजागर हो रही है। कई विद्यालयों ने सूचनाएं आधी-अधूरी दी हैं तो 18 मदरसों ने इस कार्य को शुरू ही नहीं किया है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र नारायण सिंह ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को पत्र लिखकर उनके विभाग के अंतर्गत संचालित मदरसों को निर्देशित करने की अपील की है।
18 मदरसों की सूची भेजते हुए बीएसए ने बताया कि उन्होंने बार-बार निर्देशों के बावजूद सूचनाएं आनलाइन करने का कार्य शुरू नहीं किया है। यू डायस प्लस पर शिक्षक, छात्र की जानकारी के साथ ही बैठने की व्यवस्था, पढ़ाई का माध्यम, भवन की स्थिति आदि के बारे में भी जानकारी देनी होगी।
तीन दर्जन स्कूलों को नोटिस : करीब तीन दर्जन ऐसे विद्यालय हैं, जिन्हें बीएसए ने नोटिस जारी की है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित 37 विद्यालयों ने सूचनाएं पूरी नहीं की हैं। विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है कि अब तक सूचनाएं अपलोड क्यों नहीं की गईं। इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। नौ जुलाई तक इन विद्यालयों को सूचनाएं अपलोड करने का कार्य पूरा करना होगा।

Sunday, July 7, 2019

गोरखपुर : अंग्रेजी माध्यम: आठ को नहीं होगी चयन परीक्षा


बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत संचालित अंग्रेजी माध्यम के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के पदस्थापन के लिए आठ जुलाई को प्रस्तावित चयन परीक्षा को फिलहाल टाल दिया गया है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य ने चयन परीक्षा के बारे में बीएसए से जानकारी मांगी थी। बीएसए की ओर से परीक्षा स्थगित करने की जानकारी दी गई है। परीक्षा की नई तिथि बाद में घोषित की जाएगी।

गोरखपुर : अनुपस्थित मिले शिक्षकों पर कार्रवाई


परिषदीय विद्यालयों की औचक जांच शनिवार को भी जारी रही। औचक जांच में अनुपस्थित मिलने पर कई शिक्षकों का वेतन रोकने का आदेश दिया गया है। खंड शिक्षा अधिकारी ब्रrापुर ने प्राथमिक विद्यालय लालपुर की जांच की। जांच में इंचार्ज प्रधानाध्यापक अनिता गुप्ता एवं दो शिक्षामित्र अनुपस्थित मिले। विद्यालय की रंगाई-पुताई भी नहीं कराई गई थी। प्रधानाध्यापक का जुलाई माह का वेतन एवं शिक्षामित्रों का मानदेय रोक दिया गया है। खंड शिक्षा अधिकारी भटहट की जांच में पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिपरी में सहायक अध्यापक शिप्रा अग्रवाल बिना सूचना के पांच जुलाई से अनुपस्थित मिलीं। सहायक अध्यापक विजय बहादुर मल्ल भी अनुपस्थित पाए गए। अनुपस्थित अवधि का दोनों का वेतन रोक दिया गया है। इसी प्रकार ग्रामीणों की शिकायत पर सहजनवां क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय झकही के सहायक अध्यापक सत्यपाल उपाध्याय की उपस्थिति की जांच की गई। जांच में वह अनुपस्थित मिले। उनका अनुपस्थित अवधि का वेतन रोक दिया गया है।