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Saturday, June 29, 2019

मऊ : जन्मतिथि में हेराफेरी दो शिक्षक बर्खास्त


अपने प्रमाण पत्रों पर जन्मतिथि में हेराफेरी कर बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक की नौकरी हथियाने वाले दो तथाकथित शिक्षकों को शुक्रवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी त्रिपाठी ने बर्खास्त कर दिया। इसके साथ ही दोनों के विरुद्ध संबंधित थाना क्षेत्रों में संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराने तथा भुगतान किए गए वेतन की रिकवरी कराने का संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। बर्खास्त शिक्षकों में एक रतनपुरा शिक्षा क्षेत्र के गाढ़ा प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक विजय कुमार यादव तथा दूसरे बड़रांव शिक्षा क्षेत्र के भिखारीपुर प्राइमरी विद्यालय के सहायक अध्यापक कमलाकांत यादव हैं।

Sunday, May 26, 2019

अंबेडकर विद्यालयों के 74 शिक्षकों पर लटक रही तलवार


मऊ: जिले में समाज कल्याण द्वारा संचालित अंबेडकर प्राथमिक विद्यालयों के दो साल पहले 74 शिक्षकों की नियुक्ति में की गई धांधली की जांच में 22 अध्यापकों के शैक्षिक प्रमाण पत्र संदिग्ध होने की रिपोर्ट समाज कल्याण निदेशक ने अपनी संस्तुति के साथ शासन को भेज दिया है। यदि शासन से इस रिपोर्ट पर कार्रवाई हो गई तो जिले के इन 22 अध्यापकों की नौकरी जानी तय मानी जा रही है। अगर जांच विस्तृत और निष्पक्ष तरीके से हो गई तो 74 अध्यापकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। नियुक्ति में अनियमितता के चलतेेे 24 फरवरी 2018 को 20 अंबेडकर विद्यालयों के प्रबंधकों के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज है जिसकी विवेचना लंबित है।
अंबेडकर स्कूलों में सहायक 74 अध्यापकों की नियुक्ति में फर्जीवाड़ा की शिकायत मुख्यमंत्री से की गई तो 24 फरवरी 2018 को तत्कालीन जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु ने बीएसए कार्यालय पर औचक छापा मारकर अंबेडकर विद्यालयों के अध्यापकों की नियुक्तियों के अनुमोदन संबंधी पत्रावलियों की तलाश किया था। उस समय केवल 32 अध्यापकों के अनुमोदन की फाइलें मिली थीं जिन्हें डीएम ने ट्रेजरी के लाकर में जमा करा दिया। इसके बाद डीएम ने प्रकरण की जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच टीम गठित किया। मामला संदिग्ध पाए जाने पर डीएम के निर्देश पर बीएसए और समाज कल्याण अधिकारी ने 20 अंबेडकर विद्यालयों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करा दिया। उधर समाज कल्याण विभाग ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर संयुक्त निदेशक समाज कल्याण सुनील कुमार सिंह बिसेन की अध्यक्षता में जिला समाज कल्याण अधिकारी चंदौली और डीडीआर गोंडा की तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन करके प्रत्येक अध्यापक के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच कराई। जांच के दौरान समिति ने पाया कि 42 अध्यापकों के अनुमोदन ही नहीं हैं। जबकि 32 अध्यापकों का अनुमोदन फर्जी है। जबकि 16 अध्यापकों के टीईटी के प्रमाणपत्र नेट पर नहीं दिख रहे हैं। इसके अलावा कई अन्य के शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी संदिग्ध पाए गए। हालांकि इस मामले में शिकायत कर्ता गांव बचाओ मोर्चा के यूू पी राय द्वारा इस जांच में भी कई संदिग्धों को बचाने के प्रयास के आरोप लगाए गए हैं फिर भी छह अध्यापकों की सेवा समाप्ति की सिफारिश के साथ अन्य 16 अध्यापकों के भी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के संदिग्ध होने की बात मानते हुए 13 फरवरी 2019 को अपनी रिपोर्ट निदेशक समाज कल्याण को भेज दिया। जहां से अपनी संस्तुति के साथ निदेशक ने यह रिपोर्ट शासन को भेज दिया है। सूत्रों की माने तो अगर इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई गई तो सभी 74 अध्यापकों की नौकरी जा सकती है। 


राष्टपति को पत्र भेजकर हस्तक्षेप करने की गुहार
मऊ। इस मामले में गांव बचाओ मोर्चा की तरफ से राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर फर्जीवाड़ा में शामिल सभी लोगों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई कराने की मांग की गई है। 

यह प्रकरण अब शासन स्तर पर है, यह प्रकरण मेरे द्वारा यहां कार्यभार संभालने से काफी पहले का है।
- विनोद यादव ,जिला समाज कल्याण अधिकारी, मऊ
सुभाष यादव

Thursday, May 2, 2019

मऊ: फर्जी डिग्री से नौकरी में 15 शिक्षक बर्खास्त


फर्जी डिग्री लगाकर प्राथमिक विद्यालयों में 10 साल और छह साल से नौकरी कर रहे 15 शिक्षकों को बीएसए ने तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। मामले की शिकायत पर तीन महीने से गोपनीय जांच करायी जा रही थी। खण्ड शिक्षाधिकारियों को संबंधित शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर और धन रिकवरी के निर्देश दिये गये हैं। सभी फर्जी डिग्री बीएड व सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की लगायी गयी थी। बीएसए की कार्रवाई से शिक्षकों में खलबली मच गयी है।
जिला बेसिक शिक्षाधिकारी ओपी त्रिपाठी को तीन महीने पूर्व गोपनीय शिकायत प्राप्त हुई कि शिक्षा क्षेत्र रानीपुर, रतनपुरा, मुहम्मदाबाद, कोपागंज, बड़रांव, फतेहपुर मंडाव और दोहरीघाट में तैनात 15 शिक्षक विभिन्न विश्वविद्यालयों के साथ-साथ सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री लगाकर वर्ष 2010 से 2016 तक के बीच नौकरी कर रहे हैं। मामले को गम्भीरता से लेते हुए बीएसए ने संबंधित खण्ड शिक्षाधिकारियों को जांच के लिए लगाया था। इसमें मामला सही उजागर होने पर बीएसए ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सहायक अध्यापक प्रेमचंद पंकज फर्जी डिग्री बीएड 2005, उर्मिला देवी फर्जी बीएड 2005, पष्पा बीएड 2005, हीरालाल बीएड 2005, पुष्पा मौर्या बीएड 2002, सुशील कुमार बीएड 2004, पंकज कुमार पूर्व मध्यमा 1994, उत्तर मध्यमा 1998 एवं शास्त्री परीक्षा 2002, अविनाश बीएड 2003, सुनीता कुमार बीएड 2006, कृष्णकांत यादव बीएड 2002, उर्मिला यादव उत्तर मध्यमा एवं शास्त्री परीक्षा 2004, राधेश्याम यादव शास्त्री परीक्षा 2008, उमेश चंद शास्त्री 2007, रामजनम शास्त्री 2004 व मनीष कुमार यादव शास्त्री 2006 को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करते हुए इन शिक्षकों पर एफआईआर और धन की रिकवरी के लिए भी निर्देश दिये हैं। बीएसए ने बताया कि फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले शिक्षकों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जायेगा। मामले को अभी और गम्भीरता से लिया जा रहा है।