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Sunday, December 8, 2019

बेसिक शिक्षा विभाग की नई संशोधित नियमावली, ऐडेड जूनियर अध्यापकों की भर्ती और सेवा शर्तों में संशोधन हेतु शासनादेश...


शिक्षा विभाग
शिक्षा अनुभाग 6
1/2019/1917 /अड़सठ-3-2019-28(35)/2001 04/12/2019
अधिनियम/अध्यादेश/नियमावली
उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल (जूनियर हाई स्कूल) (अध्यापकों की भर्ती और सेवा की शर्तें) (सातवा संशोधन) नियमावली, 2019


















 

शासनादेश Pdf देखें

Wednesday, June 12, 2019

प्रयागराज : 69 हजार शिक्षक भर्ती में बीएड योग्यताधारियों को मिला मौका


  • भर्ती के लिए चार लाख 31 हजार से अधिक ने किया था आवेदन
  • कटऑफ अंक को लेकर कोर्ट में चल रही सुनवाई, रिजल्ट फंसा


बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए बीएड को मान्य करने पर भले ही कैबिनेट ने मंगलवार को मुहर लगाई है लेकिन, बीएड योग्यताधारियों को 69000 शिक्षक भर्ती में ही मौका दिया जा चुका है। आवेदन लिए जाने के समय यह बात उठी थी कि परिषद की अध्यापक सेवा नियमावली में संशोधन नहीं हुआ है। योगी सरकार ने एनसीटीई के निर्देश को मान्य कर दिया है।
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी एनसीटीई नई दिल्ली ने 28 जून, 2018 को अधिसूचना जारी कर प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक के पदों पर नियुक्ति के लिए मान्यता प्राप्त संस्थान से शिक्षा स्नातक (बीएड) प्रशिक्षण को मान्यता दी थी। कहा गया कि अध्यापक के रूप में नियुक्त व्यक्ति को प्राथमिक शिक्षक के रूप में नियुक्त होने पर दो वर्ष के भीतर ब्रिज कोर्स पूरा करना अनिवार्य होगा। इसके पहले सिर्फ बीटीसी प्रशिक्षण पर ही सहायक अध्यापक नियुक्त होते थे। अब दोनों मान्य हैं। यह संशोधन 28 जून, 2018 से ही इसलिए लागू किया गया है, क्योंकि 69000 शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया दिसंबर 2018 में शुरू हुई और उसमें एनसीटीई के निर्देश पर बीएड अभ्यर्थियों से भी आवेदन लिए गए।
69 हजार पदों के लिए चार लाख 31 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। अभ्यर्थियों की संख्या तेजी से बढ़ने का कारण बीएड योग्यताधारी ही थे, क्योंकि इसके पहले 68500 सहायक अध्यापक भर्ती के लिए महज सवा लाख ही आवेदन हो सके थे, उस समय तक बीएड प्राथमिक स्कूलों में मान्य नहीं था। योगी सरकार के इस कदम से 69000 शिक्षक भर्ती में चयन को लेकर अब विवाद नहीं रहेगा।

Tuesday, June 4, 2019

32 हजार 22 अनुदेशकों समेत चार भर्तियों का विवाद भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा


उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में चार भर्तियों का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने खाली पदों पर भर्ती का आदेश दिया था। लेकिन प्रदेश सरकार ने भर्ती करने की बजाय हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर कर दी है। 
इनमें उच्च प्राथमिक स्कूलों में 32 हजार 22 अंशकालिक अनुदेशकों और प्राथमिक स्कूलों में उर्दू विषय के चार हजार  सहायक अध्यापकों की भर्ती शुरू नहीं हो सकी है। जबकि 12 हजार 460 और 16 हजार 448 सहायक अध्यापक भर्ती के रिक्त पदों को भरने का मामला है। इसी के साथ उच्च प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान व गणित विषय के 29 हजार 334 सहायक अध्यापकों की सीधी भर्ती का विवाद भी सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। फिलहाल इन भर्तियों के लिए आवेदन करने वाले लाखों बेरोजगार सड़क की ठोकरें खा रहे हैं।
32 हजार 22 अंशकालिक अनुदेशक: शारीरिक शिक्षा विषय के 32 हजार 22 अंशकालिक अनुदेशकों की भर्ती के लिए सपा शासनकाल में आवेदन लिए गए थे। 11 महीने के लिए सात हजार रुपये मानदेय पर प्रस्तावित भर्ती के लिए 1.5 लाख से अधिक बीपीएड, सीपीएड और डीपीएड योग्यताधारी अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। 4 से 9 अप्रैल 2017 तक काउंसिलिंग होनी थी लेकिन 23 मार्च 2017 को ही सरकार ने भर्ती पर रोक लगा दी थी।
4000 उर्दू शिक्षक: परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में उर्दू विषय के 4000 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए भी सपा शासनकाल में दिसंबर 2016 में प्रक्रिया शुरू हुई थी। लेकिन यह भी 23 मार्च 2017 को रोक दी गई थी। यह मामला भी सर्वोच्च न्यायालय में पहुंचा है। इससे पूर्व 17 अगस्त 2013 में शुरू हुई उर्दू विषय के 4,280 सहायक अध्यापक भर्ती में 2341 पद भरे गए थे।
12 हजार 460 सहायक अध्यापक: इस भर्ती के लिए भी दिसंबर 2016 में प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसमें कई जिलों में शून्य पद थे। शून्य पद वाले जिले के अभ्यर्थियों को दूसरे जिलों में आवेदन का मौका दिया गया लेकिन दूसरे जिले के अभ्यर्थियों ने यह कहते हुए हाईकोर्ट में याचिका कर दी की इससे उनके अवसर कम हो जाएंगे। इस भर्ती के तहत पहली काउंसिलिंग में तकरीबन 5900 पद ही भरे जा सके थे। उसके बाद से यह विवाद में न्यायालय में लंबित है और बचे हुए 6500 से अधिक पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी है। 
16 हजार 448 सहायक अध्यापक: परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 16448 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए 16 जून 2016 को प्रक्रिया शुरू हुई थी। तमाम अभ्यर्थी ऐसे थे जिन्होंने नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद ज्वाईन नहीं किया था। इसमें तकरीबन 500 पद खाली रह गए थे। इन खाली पदों पर भर्ती के लिए अभ्यर्थियों ने याचिका की थी जो अभी विचाराधीन है। 

Friday, May 31, 2019

69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा परिणाम पर हाईकोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक


प्रदेश में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती परीक्षा के परिणाम जारी करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने सरकार को परीक्षा की उत्तर-कुंजी जारी करने की छूट दी है। इस मामले में सरकार की ओर से बेसिक शिक्षा विभाग सहित अभ्यर्थियों द्वारा दाखिल 15 से अधिक याचिकाओं पर साथ सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई जुलाई के पहले हफ्ते के लिए रखी गई है।
हाईकोर्ट में सरकार की ओर से कहा गया कि किसी परीक्षा के लिए क्वालिफाइंग अंक निर्धारित करना सरकार का विशेषाधिकार है। इसे अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। साथ ही कहा कि छह जनवरी 2019 को हुई सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के आयोजक परीक्षा नियामक प्राधिकरण ने प्रश्नपत्र की उत्तर कुंजी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी थी। यह एक क्वालिफाइंग परीक्षा थी, इसके आधार पर भर्ती प्रक्रिया तैयार की जानी थी। यह भी साफ किया कि अभी तक इस परीक्षा के आधार पर कोई भर्ती नहीं की गई है।

मामला एक नजर में

सरकार ने एकल जज के सात जनवरी को आए उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कहा गया था कि कट ऑफ तय करने का प्रदेश सरकार का शासनादेश निरंकुशतापूर्ण और समानता के अधिकार के विपरीत है। कोर्ट ने इसे कानूनी रूप से वैध नहीं माना था। साथ ही कहा था कि इसकी वजह से समान वर्ग के अभ्यर्थियों में दो श्रेणियां बन जाती हैं। अचानक कट ऑफ को बड़ी संख्या में बढ़ाने की कोई वैध वजह नहीं दी गई है, न ही इसका जस्टिसफिकेशन सरकार ने दिया है।

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हजार प्रभावित, भर्ती 69 हजार की है : महाधिवक्ता
हाईकोर्ट में सरकार की ओर से महाधिवक्ता राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कुल 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती इस परीक्षा से की जा रही है। इसे लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में दायर याचिका से करीब 6900 अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं। वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं से करीब 15 हजार अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में समस्त चयन प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

आपत्तियां

1.    याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि एकल जज का निर्णय सही था, कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार था। ऐसे में चयन प्रक्रिया कुछ हिस्से जैसे उत्तर-कुंजी प्रकाशित करने और इस पर अभ्यर्थियों से आपत्तियां लेने व विचार करने की अनुमति दी जा सकती है। इसमें करीब दो महीने का समय लग सकता है, जिसके बाद मामले को सुना जाए।
2.    एक अन्य याची के अधिवक्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2017 को अपने निर्णय में शिक्षा मित्रों को दो दफा लगातार होने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया था। ऐसे में एक परीक्षा होने के बाद दूसरी परीक्षा में कट ऑफ बढ़ाकर अतिरिक्त योग्यता की शर्त नहीं लगाई जा सकती। भले ही सरकार को इसका अधिकार हो, लेकिन सरकार ऐसा करती है तो यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश को निष्प्रभावी करने जैसा होगा। याची शिक्षामित्र प्रतियोगिता से बाहर हो जाएंगे। ऐसे में अपील पर अंतिम निर्णय आने पर सरकार को परिणाम जारी करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

और निर्णय

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि इस मामले पर उसे और विचार करने की जरूरत है। ऐसे में अंतरिम तौर पर यह अनुमति दी जाती है कि राज्य सरकार उत्तरकुंजी जारी करे। इस पर आपत्तियां ले और फिर अंतिम उत्तरकुंजी जारी हो। लेकिन परीक्षा के अंतिम परिणाम कोर्ट की अनुमति मिलने या विशेष अपील याचिकाओं पर अंतिम निर्णय होने तक जारी न करे। अगली सुनवाई जुलाई के पहले हफ्ते में की जाएगी।

Saturday, May 25, 2019

शिक्षक भर्ती में कोर्ट के आदेश के बाद भी जारी नहीं हुआ रिजल्ट


प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 68500 शिक्षकों की भर्ती में मूल्यांकन में गड़बड़ी के बाद कोर्ट के आदेश के पुनर्मूल्यांकन में सफल घोषित किए गए अनिरूद्घ नारायण शुक्ला ने सचिव परीक्षा नियामक पर कोर्ट के आदेश के बाद नियुक्ति नहीं देने का आरोप लगाया है। मूल्यांकन में गड़बड़ी के बाद परीक्षार्थी अनिरूद्घ नारायण शुक्ला ने कोर्ट में याचिका दाखिल की, इस मामले में कोर्ट के आदेश के बाद दोबारा हुए मूल्यांकन में गलत तरीके से कॉपी जांचे जाने के बाद याची ने कोर्ट से गुहार लगाई तो सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी को इस मामले को दो महीने में निस्तारित करने का आदेश हुआ। अनिरूद्घ नारायण शुक्ला का कहना है कि तीन अप्रैल के आदेश को तीन जून को दो महीने पूरे हो जाएंगे परंतु अभी तक परीक्षा नियामक की ओर से इस संबंध में कुछ भी नहीं किया गया। याची का कहना है कि अभी तक परीक्षा नियामक की ओर से रिजल्ट तक जारी नहीं किया गया, ऐसे में दो महीने में नियुक्ति कैसे मिलेगी।
परीक्षार्थियों का कहना है कि प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 68500 शिक्षकों की भर्ती में मूल्यांकन में गड़बड़ी के दोषी दोनों अधिकारियों तत्कालीन सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी डॉ. सुत्ता सिंह एवं रजिस्ट्रार जीवेंद्र सिंह ऐरी को सरकार ने बहाल कर दिया। जबकि इसी मामले में परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को राहत नहीं मिल सकी है। परीक्षार्थियों के पक्ष में कोर्ट के निर्णय के बाद भी उनको ज्वाइनिंग नहीं मिल रही है।