सूबे के माध्यमिक
संस्कृत स्कूलों में विद्यार्थियों को देववाणी पढ़ाना मुश्किल हो रहा है। स्कूलों
में प्रधानाचार्य के करीब 62 फीसद और शिक्षकों के
करीब 52 फीसद पद खाली चल रहे हैं। प्रथमा (कक्षा आठ) से लेकर उत्तर मध्यमा द्वितीय
(इंटरमीडिएट) तक पढ़ रहे करीब 90 हजार विद्यार्थियों
को पढ़ाना कठिन हो रहा है। एक उम्मीद इस बात से जगी है कि सरकार अपनी उपलब्धियों
का प्रचार-प्रसार संस्कृत में भी करेगी, इससे शायद
विद्यार्थियों के अच्छे दिन भी शुरू हों। उप्र माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद
द्वारा 1151 संस्कृत विद्यालयों का संचालन हो रहा है। इसमें 973 सरकारी सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक संस्कृत विद्यालय हैं और इसमें 973 प्रधानाचार्य के पदों में 604 पद रिक्त हैं
Wednesday, June 19, 2019
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