Showing posts with label बेसिक शिक्षा. Show all posts
Showing posts with label बेसिक शिक्षा. Show all posts

Saturday, August 4, 2018

कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों से नहीं हटेंगे प्रधानाध्यापक बेसिक शिक्षा परिषद ने आरटीई एक्ट 2009 के तहत किया पद निर्धारण निर्देश


प्रदेश के जिन प्राथमिक स्कूलों में आरटीई एक्ट 2009 में दिए गए मानक से कम छात्र संख्या है, वहां के प्रधानाध्यापकों को समायोजन प्रक्रिया में हटाया नहीं जाएगा, बल्कि उन स्कूलों में छात्र संख्या के आधार पर यदि शिक्षकों की कमी है तो तैनाती की जाएगी। यह बेसिक शिक्षा परिषद सचिव संजय सिन्हा ने सभी बीएसए को दिया है।1परिषद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों की प्रदेश भर में जिले के अंदर समायोजन व पारस्परिक स्थानांतरण की प्रक्रिया चल रही है। शासन ने 20 जुलाई को जारी आदेश में कहा है कि 30 सितंबर 2017 की छात्र संख्या के आधार पर आरटीई एक्ट 2009 के अनुसार विद्यालयों का पद निर्धारण किया जाए। परिषद ने जिलों से छात्र संख्या लेकर आरटीई एक्ट के अनुरूप पद निर्धारण कर दिया है। विद्यालयवार पद निर्धारण के अलावा भी परिषद ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों को दिए हैं कि तय पद एक्ट के अनुरूप हैं, किंतु स्थानांतरण व समायोजन की कार्यवाही वर्ष 2011 व शासन की ओर से सर्व शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2015 (29 जुलाई 2015 को नवीन विद्यालय के लिए स्वीकृत) में समन्वित रूप से जिले के लिए स्वीकृत पदों से अधिक नहीं की जाएगी। आरटीई एक्ट में प्राथमिक स्कूलों के लिए 150 व उच्च प्राथमिक के लिए 100 से कम छात्र संख्या पर प्रधानाध्यापक के पद का प्राविधान नहीं है लेकिन, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित विद्यालयों में जहां पूर्व में सृजित प्रधानाध्यापक के पद पर प्रधानाध्यापक कार्यरत हैं, उन्हें हटाया नहीं जाएगा। सचिव ने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्कूल में 58 छात्र हैं और वहां एक प्रधानाध्यापक ही कार्यरत है तो आरटीई के अनुसार निर्धारित कुल दो पदों में प्रधानाध्यापक को न हटाते हुए एक सहायक अध्यापक की नियुक्ति की जाएगी। आरटीई एक्ट में यह भी प्राविधान है कि प्रत्येक दशा में प्राथमिक स्कूल में 60 छात्रों पर न्यूनतम दो अध्यापक व उच्च प्राथमिक स्कूल में विषयवार न्यूनतम तीन अध्यापकों की उपलब्धता रहेगी। सचिव ने दिया कि परिषदीय स्कूलों में समायोजन का उद्देश्य सभी स्कूलों में नामांकन के अनुरूप अध्यापकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है न कि अनावश्यक रूप से अध्यापकों को हटाया जाना है। इसलिए अध्यापकों की उपलब्धता का आकलन करने के बाद ही समायोजन की कार्यवाही की जाए। इस प्रक्रिया में किसी तरह की कठिनाई हो तो जिले स्तर पर गठित समिति के समक्ष उसे प्रस्तुत कर निस्तारित कराएं, परिषद से अनावश्यक पत्रचार न करें। यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी करें और कार्यवाही से परिषद को भी अवगत कराएं। इसमें लापरवाही पर कठोर कार्रवाई होगी।



Wednesday, July 25, 2018

गोरखपुर - देवरिया ही नहीं पूरे उत्तर प्रदेश में चल रहे इस्लामिया स्कूल


बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों को 'इस्लामिया नाम जोड़कर नया कलेवर देने वाले स्कूल सिर्फ गोरखपुर-देवरिया ही नहीं पूरे प्रदेश में संचालित हैं। गोरखपुर और देवरिया जनपद में ऐसे स्कूल संचालित होने का मामला सामने आया है जहां प्राथमिक विद्यालय के आगे इस्लामिया शब्द जोड़कर मनमाने तौर पर अवकाश का दिन भी रविवार के स्थान पर शुक्रवार तय कर लिया गया। पड़ताल करने पर पता चला कि ऐसा सिर्फ एक-दो नहीं लगभग सभी जिलों में हो रहा है। 'जागरण की पड़ताल में सुलतानपुर में ऐसे सात, बाराबंकी में चार, सीतापुर व हरदोई में तीन-तीन, फैजाबाद व श्रावस्ती में एक-एक स्कूल मिले जहां स्कूल के नाम के पहले या बाद में इस्लामिया लिखा है।
रविवार की जगह शुक्रवार को अवकाश 
सुलतानपुर में दूबेपुर ब्लॉक के मुस्लिम बहुल गांव बनकेपुर, फिरोजपुर कलां, कुड़वार ब्लॉक के धरावां व गंजेहड़ी, बल्दीराय के नंदौली, दोस्तपुर नगर पंचायत व कूड़ेभर ब्लाके के इटकौली में ये विद्यालय स्थित हैं। यहां रविवार की जगह शुक्रवार को अवकाश होता है। बाराबंकी में दरियाबाद, बनगवां, मोहल्ला गढ़ी, सतरिख में इस्लामिया नाम से स्कूल संचालित हैं। अब यहां डीएम उदयभानु के निर्देश पर बीएसए जांच कर रहे हैं, जिन्होंने बुधवार तक सभी संकुल प्रभारियों से ऐसे विद्यालयों की सूची देने को कहा है। श्रावस्ती जिला मुख्यालय भिनगा के उच्च प्राथमिक विद्यालय सत्तीचौरा की दीवार पर मोटे अक्षरों में इस्लामिया प्राथमिक विद्यालय भिनगा अंकित है। सीतापुर के लहरपुर क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय गांधीनगर, शाहकुलीपुर, सुल्तानापुर शाहपुर इस्लामिया नाम से चलते हैं। यहां के बीएसए अजय कुमार ऐसी किसी जानकारी से इन्कार करते हैं। फैजाबाद में सोहावल खंड शिक्षाक्षेत्र में इस्लामिया प्राथमिक विद्यालय कोला का संचालन हो रहा है।
हरदोई में तीन स्कूल पर छुट्टी रविवार को ही 
हरदोई में तीन परिषदीय विद्यालयों में इस्लामिया स्कूल लिखे होने की बात सामने आई है। बिलग्राम के मलकंठ मुहल्ले में 1934 से विद्यालय स्थापित है, तो बावन का इस्लामिया स्कूल अल्पसंख्यक आबादी में है। पाली का भी यही हाल है। लेकिन इन स्कूलों में रविवार को ही छुट्टी होती है। बीएसए हेमंतराव का कहना है कि वह पूरी जानकारी लेंगे। गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई होगी।
तीन स्कूलों के नाम के आगे से हटाया गया इस्लामिया
जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आए अधिकारियों ने आनन-फानन गोरखपुर के दोनों स्कूलों के आगे से इस्लामिया शब्द मिटवा दिया। देवरिया में भी एक अन्य विद्यालय के नाम के आगे से इस्लामिया शब्द हटवाया गया। उधर, महराजगंज में मिले एकमात्र इस्लामिया स्कूल में अवकाश का दिन शुक्रवार से बदल कर रविवार कर दिया गया। 
प्राइमरी व जूनियर स्कूलों में हो रही शुक्रवार को छुट्टी
मेरठ : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों के नाम में 'इस्लामिया जोडऩे के मामले कुछ जिलों में मिले हैं। मेरठ में ऐसा कोई स्कूल नहीं है, लेकिन कई स्कूलों ने रविवार की जगह शुक्रवार का अवकाश जरूर लागू कर रखा है। ऐसे स्कूल अधिकतर ग्रामीण अंचलों में हैं। इनमें प्राइमरी व जूनियर स्कूल मेदपुर रजपुरा ब्लॉक, प्राइमरी स्कूल कायस्थ बड्ढा माछरा ब्लॉक, खरखौदा बीआरसी स्थित प्राइमरी व पूर्व माध्यमिक स्कूल, प्राथमिक विद्यालय जानीकलां, सिवाल, सिवाल नंबर-दो आदि में शुक्रवार को छुट्टी होती है और रविवार को बच्चों को स्कूल बुलाया जाता है। 
विभाग ने नहीं भेजा कोई पत्र
प्राइमरी स्कूल कायस्थ बड्ढा के इंचार्ज जितेंद्र के अनुसार वे वर्ष 2014 से विद्यालय में हैं। इससे पहले से ही गांव वालों की ओर से स्कूल की छुट्टी शुक्रवार को करवाई जा रही है। रविवार को स्कूल खुला रहता है। उन्होंने बताया कि बीएसए की ओर से शुक्रवार के बजाय रविवार को स्कूल खोलने संबंधी कोई पत्र नहीं आया है। जूनियर स्कूल मेदपुर की इंचार्ज क्रिस्टिना प्रसाद के अनुसार पिछले सप्ताह बीएसए की ओर से पत्र भेजा गया जिसमें स्कूल को शुक्रवार की बजाय रविवार को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल में रविवार को छुट्टी होने लगी है। इस व्यवस्था के बाद से मुस्लिम समुदाय के बच्चे स्कूल से नाम कटवाकर मदरसे में दाखिला लेने लगे हैं। 
फैज-ए-आम में भी ताक पर नियम 
मेरठ के दिल्ली रोड स्थित फैज-ए-आम इंटर कालेज में भी माध्यमिक शिक्षा परिषद के नियमों का पालन नहीं किया जाता। इसमें भी सभी बच्चों की छुट्टी शुक्रवार को होती है, जबकि रविवार को स्कूल खुलता है। स्कूल के प्रधानाचार्य अली जान का कहना है कि स्थापना के समय से ही यह कालेज शुक्रवार को बंद रहता है और रविवार को खुला रहता है। यह उनके स्कूल की नियमावली में है और परिषद से अनुमति प्राप्त है।  
परिषद की नियमावली में रविवार के स्थान पर शुक्रवार को अवकाश रखने संबंधी कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं। यदि फैज-ए-आम को परिषद से कोई विशेष अनुमति मिली है तो दस्तावेज मांगे जाएंगे। अगर ऐसे दस्तावेज नहीं मिले तो उन्हें भी परिषद के नियमों के अनुरूप ही स्कूल संचालन करना होगा।
-गिरजेश कुमार चौधरी, जिला विद्यालय निरीक्षक। 
परिषद की नियमावली में ऐसा कोई नियम नहीं है कि रविवार की बजाय किसी और दिन छुट्टी कर ली जाए। मेदपुर का मामला संज्ञान में आया था जिसे रविवार को बंद कर शुक्रवार को खुलवा दिया गया है। और भी स्कूल इस तरह संचालित हो रहे हैं, तो उन्हें शुक्रवार के स्थान पर रविवार को अवकाश रखने के निर्देश जारी किए जाएंगे।
-सतेंद्र कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी।

Monday, July 23, 2018

छात्रों को फेल नहीं करने की व्यवस्था खत्म, प्राथमिक शिक्षा में परीक्षा बहाल करने विधेयक लोकसभा से पारित


बीएसए और शिक्षक को चेतावनी, जिम्मेदारी से काम करो या नौकरी छोड़ दो


बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रभात कुमार ने चेतावनी दी है कि बीएसए और शिक्षक अपना काम जिम्मेदारी से करके नतीजे दें या नौकरी छोड़ दें। उन्होंने ट्वीट किया कि शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण के भुगतान की स्वीकृति में चल रहा भ्रष्टाचार का खेल अब नहीं चलेगा।
विभाग में सिटीजन चार्टर लागू करने के अगले ही दिन रविवार सुबह ट्वीट में अपर मुख्य सचिव ने सभी बीएसए को निर्देश दिए हैं कि वे सुनिश्चित करेंगे कि शिक्षकों व कर्मचारियों के बकाया भुगतान, लाभ-परिलाभ और अवकाश स्वीकृतियां निर्धारित अवधि में पूरी हों। वह खुद इसकी मॉनिटरिंग करेंगे, यदि बीएसए ने समय पर काम नहीं किया या कराया तो फिर कार्रवाई झेलने के लिए तैयार रहें। 

अपर मुख्य सचिव ने शिक्षकों को भी समय पर कक्षा में उपस्थित होने, विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक माहौल तैयार करने और विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा देने की नसीहत दी है। 

2 से 10 प्रतिशत तक है खेल

बेसिक शिक्षा विभाग में 35-40 साल की सेवा के बाद मिलने वाली पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण का भुगतान लेने के लिए 2 से 10 प्रतिशत रिश्वत का खेल चलता है। बीएसए कार्यालय से लेकर कोषाधिकारी कार्यालय तक की मिलीभगत से चल रहे इस खेल में जो शिक्षक या कर्मचारी रिश्वत देते हैं, उन्हें समय पर भुगतान मिलता है, वरना भुगतान के लिए महीनों तरसना पड़ता है।

कोषाधिकारी पर भी कसी जाए लगाम  
शिक्षकों और कर्मचारियों के पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण का समय पर भुगतान कराने के लिए कोषाधिकारी पर भी लगाम कसनी जरूरी है। ऐसे अनेक मामले हैं जब शासन या निदेशालय के दबाव में बीएसए फाइल को कोषालय भेज देते हैं, लेकिन कोषाधिकारी कार्यालय में फाइल धूल खाती रहती है।


Thursday, July 19, 2018

लोकसभा ने दिखाई शिक्षा में नो डिटेंशन पॉलिसी खत्म करने को हरी झंडी


कक्षा पांच और आठ में छात्रों को फेल किए बिना उनकी प्राथमिक शिक्षा पूरी कराने वाली नो डिटेंशन पॉलिसी को खत्म करने की पहली पायदान बुधवार को पार हो गई। लोकसभा में इस पॉलिसी को खत्म करने के लिए राइट ऑफ चिल्ड्रन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन (दूसरा संशोधन) बिल 2017 पारित हो गया। हालांकि राज्यसभा में पास होने के बाद ही ये लागू हो पाएगा। उसके बाद भी गेंद राज्य सरकारों के कोर्ट में होगी कि वे संशोधन लागू कर इस पॉलिसी को खत्म करती हैं या नहीं।
कक्षा 5 व 8 में फेल करने से रोकने वाली पॉलिसी के खात्मे को राइट टू एजुकेशन बिल में संशोधन पारित

राज्यसभा में रखा जाएगा अब बिल, लागू करना या नहीं करना राज्य सरकारों पर निर्भर


दरअसल 22 राज्यों ने इस पॉलिसी के कारण शिक्षा का स्तर गिरने की बात कहते हुए इसके खात्मे की मांग केंद्र सरकार से की थी। इसके बाद संशोधन का फैसला लिया गया था। संशोधित बिल के तहत अब कक्षा पांच और आठ में अच्छा प्रदर्शन नहीं करने वाले छात्रों को एक और मौका दिया जाएगा। इस परीक्षा में भी अगर छात्र स्तरीय प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं तो उन्हें फेल घोषित कर दोबारा उसकी कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। बिल पास होने पर कक्षा पांच और आठ की परीक्षाएं भी अनिवार्य हो जाएंगी। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि इस बिल के पास होने पर प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। 

Friday, July 6, 2018

शिक्षकों को दिखना होगा स्मार्ट, बिना दाढ़ी बनाए और चप्पल पहनकर नहीं आ सकेंगे स्कूल


प्रदेश भर में बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक अब बिना दाढ़ी बनाए और चप्पल पहन कर नहीं आ सकेंगे। उन्हें स्मार्ट दिखना होगा। इसके लिए कृषि उत्पादन आयुक्त एवं बेसिक शिक्षा विभाग के नए अपर मुख्य सचिव डॉ. प्रभात कुमार ने शिक्षकों के काम के पैरामीटर तय कर दिए हैं। सभी शिक्षकों को अब 4 आई मानक पर खरा उतरना होगा। अगर वे मानक पर खरा नहीं उतरेंगे तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। इतना ही नहीं, इन विद्यालयों की अलग पहचान के लिए डॉ. कुमार ने 5 बिंदु तय किए हैं।
डॉ. कुमार बृहस्पतिवार को कार्यभार ग्रहण करने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग के शासन से निदेशालय तक के अफसरों से परिचय बैठक में मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि प्राइमरी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों से प्रतिस्पर्धा करनी है। तो अपने को हर स्तर पर बदलना होगा। स्कूलों का माहौल बदलना होगा तो शिक्षकों को भी हर मायने में प्राइवेट से खुद को बेहतर साबित करना होगा। उन्होंने इसके लिए 4-आई और 5 कार्यों का फॉर्मूला सुझाया।

उन्होंने अफसरों को शिक्षकों की ठेकेदारी प्रथा खत्म करने और शासन से स्कूल तक किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार स्वीकार न किए जाने की बात कही। उन्होंने 50 वर्ष पार वाले कर्मियों की स्क्रीनिंग के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन अधिकारी नहीं दे पाए। उन्होंने मिड डे मील सहित विभाग की विभिन्न योजनाओं व कार्यक्रमों पर अलग-अलग चर्चा करने की बात कही है।

स्कूलों की बेहतर संस्कृति को 5 बिंदुओें का फॉर्मूला

क्लीनीनेस (साफ-सफाई), पोलाइटनेस (नम्र व्यवहार), आर्डरलीनेस (सुव्यवस्था), पंक्चुअलिटी (समय का पाबंदी) और ड्यूटीफुलनेस (कर्तव्यनिष्ठ)।

मांग जायज तो कोर्ट की जगह विभाग करे कार्यवाही
डॉ. कुमार ने कहा, विभागीय मुकदमों का स्थानीय स्तर पर परीक्षण हो और जिन मामलों में कर्मी की मांग जायज है, उस पर कोर्ट की जगह विभाग ही कार्यवाही करे। इस तरह आधे कोर्ट केस खत्म हो जाएंगे। ट्रांसफर, इंक्रीमेंट, मृतक आश्रित और पेंशन जैसे मामले विभाग स्तर पर सुलझ सकते हैं। इससे केस खत्म होगा और समय व पैसे की बचत होगी।

शिक्षकों के लिए 4 आई मानक
इंटिग्रिटी, इंडस्ट्री, इंटेलीजेंस व इंडिविजुअलिटी।

निजी व सरकारी स्कूल में अंतर कम करने की रिपोर्ट पर होगा काम


डॉ. कुमार ने अफसरों से पूछा कि निजी विद्यालयों से सरकारी स्कूल क्यों पिछड़े हैं? उसे कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। इस पर एससीईआरटी के अफसरों ने बताया कि इस संबंध में अध्ययन कराया गया है। तब डॉ. कुमार ने कहा कि रिपोर्ट में जो सुझाव दिए गए हैं, उस पर विचार होना चहिए। प्राइमरी स्कूलों को प्राइवेट से बेहतर बनाने के लिए नए आइडिया लाएं।

शिक्षकों को दौड़ाने वाले अधिकारी नपेंगे
अपर मुख्य सचिव ने अफसरों को हिदायत दी है कि शिक्षकों को तनख्वाह समय से मिलनी चाहिए। मेडिकल व टीए बिल और बकाया का भुगतान समय से होना चाहिए। एसीपी लगनी है तो समय से लगे। उनकी छुट्टी समय से स्वीकृत हो। बीएसए का बाबू शिक्षक को टहला नहीं सकता। साथ ही उन्होंने चेताया, अगर शिक्षक की फाइल पैसे की वजह से रोके जाने की बात सामने आई तो खैर नहीं होगा।

बीएसए आगरा को जमानती वारंट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आगरा अर्चना गुप्ता को जमानती वारंट जारी कर 30 जुलाई को पेश होने का निर्देश दिया है और स्पष्टीकरण मांगा है कि क्यों न उन्हें अवमानना के लिए दण्डित किया जाय। यह आदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एमके गुप्ता ने नूरजहां की अवमानना याचिका पर दिया है। याची अधिवक्ता कमल कुमार केशरवानी का कहना है कि याची के पति की 57 साल की उम्र में सेवाकाल में मौत हो गयी। विभाग ने परिलाभों का भुगतान नहीं किया तो याचिका पर हाईकोर्ट ने 8 फीसदी ब्याज के साथ 3 माह में भुगतान का निर्देश दिया। इस आदेश का पालन नही किया गया तो अवमानना याचिका पर कोर्ट ने बीएसए से जवाब मांगा और हाजिर होने को कहा। न तो जवाब आया और न ही वकील के मार्फत हाजिर हुई। जिस पर जमानती वारंट जारी किया गया हैं।

हाईकोर्ट ने पूछा, बेसिक स्कूलों के टीचर-स्टाफ का कम्प्यूटराइज्ड डाटा उपलब्ध है या नहीं


कोर्ट ने कहा क्यों न पद खाली होते ही स्वत: भरने की दी जाए अनुमति
पद भरने में देरी करने वाले अधिकारियों पर क्यों न लगे अर्थदण्ड
द सहारा न्यूज ब्यूरोइलाहाबाद।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के अध्यापकों व स्टाफ के स्वीकृत पदों का कम्प्यूटराइज्ड डाटा उपलब्ध है या नहीं। यदि नहीं तो कितने समय में डाटा तैयार कर लिया जायेगा। यही नहीं कोर्ट ने यह भी पूछा है कि कितने अध्यापक व स्टाफ इस शिक्षा सत्र में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। कोर्ट ने पूछा है कि धारा- 25 के तहत अध्यापक या स्टाफ का पद रिक्त होते ही स्वत: ही खाली पदों को भरने का सिस्टम बनाया जा सकता है ताकि पद खाली होने पर भर्ती विज्ञापन की अधिकारियों से अनुमति लेने की जरूरत न पड़े। कोर्ट ने पूछा है कि अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत सत्र शुरू होते ही अध्यापकों की जरूरत पूरी करने में बाधा पहुंचाने वाले अधिकारियों के खिलाफ क्या अर्थदंड लगाया जाना चाहिए ताकि स्टाफ व शिक्षक की कमी के चलते बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 9 जुलाई को प्रमुख सचिव व बीएसए से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है और महाधिवक्ता को सरकार का पक्ष रखने के लिए अनुरोध किया है। यह आदेश हाईकोर्ट इलाहाबाद के न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी ने प्रबंध समिति नागेश्वर प्रसाद पीएमवी स्कूल देवरिया की याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि अनिवार्य शिक्षा कानून- 2009 के तहत बच्चों को शिक्षा पाने का अधिकार है। संस्था प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूल की कक्षा चलाती है। केवल चार अध्यापक ही हैं। अतिरिक्त पदों पर भर्ती विज्ञापन निकालने की अनुमति नहीं दी जा रही है जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कोर्ट ने कहा कि छात्र संख्या के आधार पर स्टाफ व अध्यापक होने चाहिए ताकि सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ न पड़े। इस पर कोर्ट ने कम्प्यूटराइज्ड डाटा तैयार करने पर बल दिया है।


Sunday, July 1, 2018

परिषदीय शिक्षकों के अन्तर्जनपदीय तबादला हेतु जारी सूची में 2 से 6 जुलाई तक दर्ज करा सकेंगे आपत्तियां, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने जारी की विज्ञप्ति


परिषदीय शिक्षकों के अन्तर्जनपदीय तबादला हेतु जारी सूची में 2 से 6 जुलाई तक दर्ज करा सकेंगे आपत्तियां, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने जारी की विज्ञप्ति

👉 upbeb.org पर डाली जाएगी मिनिमम कट ऑफ सूची
👉 कट ऑफ सूची के अंतर्गत आने वाले स्थानान्तरण से वंचित अध्यापक पीडीएफ  फाइल बनाकर ईमेल आईडी या व्हाट्सअप नम्बर पर दर्ज करा सकेंगे आपत्ति
👉 आपत्ति दर्ज कराने हेतु ईमेल आईडी  : transfer2018mincutoff@gmail. com
👉 आपत्ति हेतु व्हाट्सएप्प नम्बर : 9455413563

बहराइच: 7th Pay Arrears सातवें वेतन मेट्रिक्स में 1जनवरी 16 से 31 दिसंबर 16 के वेतन एवं मंहगाई अंतर के भुगतान हेतु वित्त एवं लेखाधिकारी ने बीईओ को बिल प्रस्तुत करने का निर्देश किया जारी।


वित्त एवं लेखाधिकारी बहराइच ने  सभी खण्ड शिक्षा अधिकारियों से एक सप्ताह में सातवें वेतन मेट्रिक्स में 1जनवरी 16 से 31 दिसंबर 16 के वेतन एवं मंहगाई अंतर के भुगतान हेतु बिल प्रस्तुत करने का निर्देश किया जारी।

प्राथमिक शिक्षक संघ ने पूर्व में पत्र देकर तथा 28 जून 18 को श्री आनंद कुमार पाठक जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में संघ के प्रतिनिधि मंडल ने वित्त एवं लेखाधिकारी बहराइच से मिलकर एरियर भुगतान की प्रक्रिया में किये जा बिलम्ब पर नाराजगी व्यक्त की थी।लेखाधिकारी ने तत्काल प्रक्रिया प्रारंभ करने का दिया था आश्वासन ।

Monday, June 25, 2018

एसटीएफ जांच में 108 फर्जी शिक्षक पाये गये


मथुरा शिक्षक भर्ती घोटाला
50 और जांच के घेरे मेंआज बीएसए कार्यालय को खुलवाकर होगी छानबीन 
सहारा न्यूज ब्यूरोलखनऊ। मथुरा में हुए शिक्षक भर्ती घोटाला लगभग 200 करोड़ रुपये से भी ऊपर का है। एसटीएफ जांच में अभी तक 108 फर्जी शिक्षक सामने आ चुके हैं, जबकि 50 और जांच के घेरे में हैं। इन सभी से 15 लाख रूपये तक लिए गए थे जबकि वर्ष 2016 में भी 32 अपात्रों की भर्ती कर ली गई थी जिसका खुलासा हुआ है। फर्जी प्रमाण पत्र भी 30 से 50 हजार रूपये लेकर बनाए गए। इस बीच एसटीएफ सोमवार को स्थानीय पुलिस व जिला प्रशासन के समक्ष सील किए गए बीएसए कार्यालय को खुलवाकर फाइलों की छानबीन करेगी। इसके साथ ट्रेजरी के दस्तावेजों का भी परीक्षण किया जाएगा। साथ ही एसटीएफ को आशंका है कि इस तरह का मामला प्रदेश के सभी जनपदों मिल सकता है क्योंकि लगातार शिकायतें मिल रही हैं। दूसरी ओर इस मामले में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से आधा दर्जन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। साथ ही फर्जी दस्तावेजों के जरिए भर्ती हुए शिक्षकों को भी निलंबित किया जा रहा है। हालांकि एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार ने कहा था कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस मामले में एसआईटी का गठन कर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एसटीएफ को आगे की कार्रवाई के लिए शासन स्तर पर निर्देश मिले हैं। साथ ही दस्तावेजों की जांच के लिए पर्याप्त समय भी चाहिए


Sunday, June 24, 2018

मथुरा शिक्षक भर्ती घोटाले की आंच कौशांबी तक, पकड़े जा चुके हैं फर्जी शिक्षक


मथुरा शिक्षक भर्ती घोटाले की आंच कौशांबी तक पहुंच गई है। डीएम के निर्देश पर विभाग ने मथुरा से स्थानांतरण होकर आए शिक्षकों की जांच शुरू कर दी है। इस बीच संत रविदास नगर (भदोही) जनपद के एक अधिवक्ता ने डीएम को पत्र भेजकर बीते दो दशक में हुई शिक्षक भर्ती की समग्र जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कई आरोप लगाए हैं। 1मथुरा में दिसंबर 2017 में 150 लोगों को फर्जी तरीके से शिक्षक बनाने का मामला सामने आया है। इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने हाल के वर्षों में मथुरा से स्थानांतरित होकर आए शिक्षकों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। पिछले तीन सालों में छह शिक्षक मथुरा से स्थानांतरित होकर जिले में आए हैं, यह शिक्षक कहां तैनात हैं, इसकी पड़ताल की जा रही है। इधर संत रविदास नगर (भदोही) के ज्ञानपुर निवासी अधिवक्ता नन्हेलाल ने डीएम को पत्र भेजकर कौशांबी जिले में 10 से 15 लाख रुपये लेकर शिक्षा माफिया द्वारा शिक्षकों की भर्ती कराने का आरोप लगाया है। डायट कौशांबी में तैनात एक लिपिक की संपत्ति की जांच की मांग इस अधिवक्ता ने की है। बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के एक लिपिक को भी कठघरे में लेते हुए कतिपय शिक्षा माफिया का मोबाइल नंबर अधिवक्ता ने अपनी शिकायत में दिया है।
पकड़े जा चुके हैं फर्जी शिक्षक : कौशांबी में फर्जी तरीके से अंक पत्र तैयार कर नौकरी दिलाने का खेल पुराना है। वर्ष 2013 में पुलिस ने डायट परिसर के पास एक वाहन से 36 अंक पत्र बरामद किया था। जांच मंझनपुर कोतवाली पुलिस को सौंपी गई थी, फर्जी अंक पत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले 23 शिक्षकों को यहां पकड़ा जा चुका है।


30 करोड़ के शिक्षक भर्ती घोटाले में एसटीएफ के हाथ बंधे, सरकार और पुलिस नहीं दे रही साथ


मथुरा में हुए शिक्षक भर्ती घोटाले में एसटीएफ के हाथ बंध गए हैं। सरकार की ओर से पूरे प्रदेश में जांच करने का कोई आदेश अब तक एसटीएफ को नहीं मिला है वहीं मथुरा में भी पुलिस की ओर से एसटीएफ को सहयोग नहीं मिल पा रहा है। एसटीएफ के खुलासे के चार दिन बाद भी अब तक रिकार्ड रूम नहीं खोला जा सका है। इसके लिए न तो पुलिस की ओर से एसटीएफ को सहयोग मिल रहा है और न ही जिला प्रशासन की ओर से।
वहीं, दूसरी ओर एसटीएफ के पास शिकायतें आने का सिलसिला जारी है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में एसटीएफ तभी आगे की कार्रवाई करेगी जब उसे शासन स्तर पर कोई निर्देश मिले। इसकी वजह यह भी बताई जा रही है कि एसटीएफ को इसके लिए अधिक बल की जरूरत होगी साथ ही दस्तावेजों की जांच के लिए पर्याप्त समय भी चाहिए होगा। वहीं अन्य जिलों के बारे में कार्रवाई के लिए अभी उन्हें शासन स्तर पर सहयोग मिलेगा, यह कहना मुश्किल है।

सरकार स्तर पर भी नहीं दिखाई जा रही गंभीरता
वही, दूसरी ओर इस बड़े घोटाले के मामले में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से आधा दर्जन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। साथ ही फर्जी दस्तावेजों के जरिए भर्ती हुए शिक्षकों को भी निलंबित किया जा रहा है। लेकिन इस मामले में और जिलों से भी शिकायतें मिलने के बाद जांच कौन करेगा? इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

हालांकि शुरुआत में एडीजी कानून व्यवस्था आनंद कुमार ने कहा था कि जरूरत पड़ी तो इस मामले में एसआईटी का गठन कर कार्रवाई की जाएगी। वहीं डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने कहा था कि इस घोटाले को उजागर करने वाली एसटीएफ को अन्य जिलों में कार्रवाई करने के लिए पंख पसारने की पूरी छूट दी जाएगी।

अब तक शासन को नहीं भेजी जा सकी रिपोर्ट

सूत्रों का कहना है कि इस मामले में बेसिक शिक्षा विभाग ने एसटीएफ से पूरी रिपोर्ट मांगी थी। कहा जा रहा है कि पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद ही अन्य जिलों में कार्रवाई की जाएगी। जबकि एसटीएफ लाख कोशिशों के बाद भी अब तक बीएसए कार्यालय का रिकार्ड रूम तक नहीं खुलवा सकी है। चूंकि मामला मथुरा में दर्ज किया गया है इसलिए वहां के विवेचक के माध्यम से ही जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।

फिरोजाबाद में भी शिक्षक भर्ती में बड़े घालमेल का आरोप
उधर, फिरोजाबाद में भी शिक्षक भर्ती में बड़े घालमेल का आरोप लगाया गया है। मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर पिछले कई महीनों से शिकायत की जा रही है। लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिलाधिकारी से लेकर बेसिक शिक्षा विभाग तक इस पूरे मामले में घपला होने की बात से इनकार कर रहे हैं। हालांकि बीएसए फिरोजाबाद की जिलाधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस मामले में 50 प्रतिशत अभिलेखों का सत्यापन कराया गया है और बाकी 50 प्रतिशत भर्ती किए गए शिक्षकों का सत्यापन कराया जाना अभी बाकी है।

गोंडा के शिकायतकर्ता ने दी आत्महत्या की धमकी
मथुरा में बड़े पैमाने पर शिक्षक भर्ती मामले में हुए गोलमाल के बाद एसटीएफ के पास शिकायतें लगातार आ रही हैं। सोशल मीडिया के जरिए गोंडा निवासी विजय पांडेय ने फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि यूपी पुलिस की ओर से इस मामले में जांच का आश्वासन दिया है। लेकिन विजय ने अपने ट्विटर हैंडिल में बताया है कि अगर 26 जून तक कार्रवाई नहीं की गई तो वह इस मामले में एसपी गोंडा के आवास के सामने आत्महत्या कर लेंगे।

अब तक 108 फर्जी शिक्षक आ चुके हैं सामने

फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाला तीस करोड़ से भी ऊपर का है। एसटीएफ की जांच में अभी तक 108 फर्जी शिक्षक तो सामने आ चुके हैं, जबकि 50 और जांच के घेरे में आ रहे हैं। इन सभी से पंद्रह लाख तक लिए गए थे। जबकि 2016 में भी 32 अपात्रों की भर्ती कर ली गई थी जिसका भी अब खुलासा हुआ है। फर्जी प्रमाण पत्र भी तीस से पचास हजार लेकर बनाए गए।

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इस भर्ती में भी मोटी रकम का लेनदेन हुआ था। जांच अधिकारियों का मानना है कि फर्जी भर्तियों के नाम पर 30 करोड़ से भी ज्यादा की रकम वसूली गई है। जो फर्जी शिक्षक गिरफ्तार हुए थे उन्होंने भी पूछताछ के दौरान बताया था कि सभी ने 15-15 लाख रुपये दिए थे। जांच एजेंसियों को जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक इस रैकेट से जुड़े कई लोगों ने कुछ ही दिनों में अपने कॉलेज तक खोल लिए हैं।