Sunday, February 1, 2015

न्यूनतम स्तर पर पहुंची अध्यापक शिक्षा


नेशनल काउंसिल फार टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) के निदेशक प्रो. संतोष पंडा ने कहा कि पूरे देश में अध्यापक शिक्षा का स्तर न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। अफसोस की बात यह है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में महज छह फीसद छात्र सफल हुए। ऐसे सभी बीएड शिक्षण संस्थाओं पर शिक्षा की गुणवत्ता पर मंथन करने की जरूरत है।
वह शनिवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में शिक्षा शास्त्र संकाय की ओर से आयोजित 'अध्यापक शिक्षा पाठ्यक्रम' विषयक दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अध्यापक शिक्षा सुधार के लिए अधिनियम-2014 लाया गया है। नेशनल कैरिकुलम फ्रेमवर्क 2014 के इसके तहत अध्यापक शिक्षा के दो वर्षीय कोर्स में सतत मूल्यांकन की व्यवस्था लागू की जा रही है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. अनिता रामपाल ने कहा कि शिक्षा व जीवन के बीच दीवार सी बन गई है। इसे समाप्त होना चाहिए। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति डा. पृथ्वीश नाग ने कहा कि वैश्विक व तकनीकी परिवर्तन के संबंध में अध्यापक शिक्षा के कोर्सो में भी परिवर्तन आवश्यक है। स्वागत संकायाध्यक्ष प्रो. कल्पलता पांडेय व धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष प्रो. गोपाल प्रसाद नायक ने किया। उद्घाटन सत्र के बाद दो तकनीकी सत्र चले। तकनीकी सत्रों में प्रो. केपी पांडेय, प्रो. शरदेंदु, प्रो. हरिकेश सिंह, प्रो. पीसी शुक्ल सहित अन्य लोगों ने विचार व्यक्त किया। संचालन डा. राजेंद्र यादव ने किया। कार्यशाला में विद्यापीठ से संबद्ध 65 बीएड कालेजों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

साभार दैनिकजागरण