Saturday, February 6, 2021

यूपी में किन नियमों के साथ खुलेंगे 8वीं तक के स्कूल? योगी सरकार ने तय की गाइडलाइन

कक्षा एक से आठवीं तक के स्कूल खोले जाने के आदेश के एक दिन बाद यूपी सरकार ने इसकी नियमावली भी जारी कर दी है। हर कक्षा में केवल 50 फीसदी विद्यार्थी ही मौजूद रहेंगे। कक्षावार दिन तय किए गए हैं। कक्षा छह के विद्यार्थी सोमवार व गुरुवार, कक्षा सात के विद्यार्थी मंगलवार व शुक्रवार और कक्षा आठ के विद्यार्थी बुधवार व शनिवार को स्कूल जाएंगे। इसी तरह कक्षा एक और पांच के विद्यार्थी सोमवार व गुरुवार को, कक्षा 2 4 के मंगलवार व शुक्रवार को और कक्षा 3 के बुधवार व शनिवार को स्कूल जाएंगे। अभिभावकों की लिखित अनुमति के बाद ही छात्र-छात्राओं को स्कूल में पढ़ने की इजाजत होगी। कक्षा छह से आठ तक के स्कूल 10 फरवरी से और कक्षा एक से पांच तक के स्कूल एक मार्च से खुल जाएंगे। 

सभी जिलाधिकारियों को भेजे गए निर्देश में साफ किया गया है कि स्कूल खोले जाने पर विद्यालय प्रबंध समिति व शिक्षक आकस्मिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होंगे। जहां विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा है, वहां दो-दो पालियों में कक्षाएं संचालित की जाएंगी। यदि कक्षा का साइज कम है तो कम्प्यूटर कक्ष, लाइब्रेरी, प्रयोगशाला आदि का इस्तेमाल कक्षा के तौर पर किया जाएगा। 

मिड डे मील दिया जाएगा, कैंटीन नहीं खुलेगी 
सरकारी व सहायता प्राप्त स्कूलों में मिड डे मील भी दिया जाएगा। भोजन वितरण से पहले विद्यार्थियों को निर्धारित दूरी का अंतराल रखते हुए साबुन से हाथ धुलवाया जाएगा। हाथ धुलने के बाद उसे पोछने के बजाय हवा में सुखाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। स्कूल की कैंटीन बंद रहेगी। स्कूल में बाहरी खाद्य सामग्री बेचने से रोका जाएगा। 

अभिभावकों से लिया जाएगा सहमति पत्र
अभिभावकों को सहमति पत्र में लिख कर देना होगा कि यदि विद्यार्थी अस्वस्थ है तो उसे स्कूल नहीं भेजेंगे। स्कूल इस बात की गारण्टी नहीं लेता कि भविष्य में कोई विद्यार्थी या अभिभावक इस महामारी से संक्रमित नहीं होगा। न ही स्कूल आने के बाद विद्यार्थी या उसके घरवालों को कोविड 19 का संक्रमण होने पर जिम्मेदार होगा। बच्चे को स्कूल भेजना पूरी तरह स्वैच्छिक है। 

ये भी निर्देश-
- अधिकतम उपस्थिति के लिए सभी पुरस्कारों को हतोत्साहित किया जाए
-  स्कूल असेम्बली कक्षाओं में ही होगी
-  किसी भी तरह का आयोजन स्कूल में नहीं होगा
- कोविड 19 के सभी प्रोटोकॉल का पालन किया जाए
- नोटिस बोर्ड पर साफ-सफाई, मॉस्क, सुरक्षा आदि के पोस्टर लगाए जाएं
-  जो बच्चे स्कूल न आएं, उनके लिए अध्ययन की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए

सरकारी स्कूलों में ज्यादा दिक्कत नहीं
सरकारी स्कूलों में नामांकित बच्चों के लगभग 50 फीसदी विद्यार्थी ही स्कूल आते हैं, इसलिए यहां ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। लेकिन निजी स्कूलों में जहां कक्षा के आकार छोटे हैं और विद्यार्थी ज्यादा हैं, वहां एक कक्षा का विद्यार्थी हफ्ते में केवल एक ही दिन स्कूल आ पाएगा क्योंकि हर कक्षा के लिए हफ्ते में दो दिन निर्धारित किए गए हैं। 










Friday, February 5, 2021

उत्तर प्रदेश में दस से खुलेंगे कक्षा छह से आठ तक के स्कूल, प्राइमरी कक्षाएं एक मार्च से



वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण के कारण बीते वर्ष लॉकडाउन के कारण बंद स्कूलों में अब छोटे बच्चे भी पढ़ाई करने जाएंगे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 23 मार्च 2019 से घरों में रहकर पढ़ाई कर रहे कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को दस फरवरी से स्कूल जाकर पढऩे के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है। इसी क्रम में प्राइमरी से कक्षा पांच तक के बच्चे एक मार्च से स्कूल जाकर पढ़ाई कर सकेंगे। इस दौरान स्कूल प्रबंधन के साथ बच्चों को भी कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। 

प्रदेश में कोरोना वायरस के कम होते प्रभाव तथा वैक्सीन आने के बाद से अभी तक कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थी स्कूल में जाकर पढ़ाई कर रहे हैं। हाईस्कूल तथा इंटर की पढ़ाई की तैयारी के कारण बच्चे एक दिसंबर के बाद से स्कूलों में जाकर अपना कोर्स पूरा करने के साथ ही प्री-बोर्ड की परीक्षा भी दे रहे हैं। इनके बाद अब कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई करने वाले बच्चों को स्कूल भेजने की योजना एक फरवरी से तैयार की जा रही थी। तीन फरवरी को सीएम योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा बैठक में भी टीम-11 को दस दिनों में कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को स्कूल में पढ़ाई के लिए बुलाने का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया था।

इसी क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग ने मुख्यमंत्री के समक्ष दस फरवरी से कक्षा छह से लेकर कक्षा आठ तक के बच्चों को स्कूल में शिक्षा देने का प्रस्ताव पेश किया। इसको मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद अब प्रदेश में दस फरवरी से कक्षा छह से आठ तक के स्कूल खोले जाएंगे। वही कक्षा एक से पांच तक के प्राइमरी स्कूल एक मार्च से खुलेंगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने कक्षा छह से आठ तक के स्कूलों को 15 फरवरी और प्राइमरी स्कूलों को एक मार्च से खोलने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के लिए भेजा था। मुख्यमंत्री ने कक्षा छह से आठ तक के स्कूलों को 10 फरवरी से खोलने का निर्देश दिया है। प्राइमरी स्कूल एक मार्च से खुलेंगे। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने यह जानकारी दी।


Saturday, April 25, 2020

मंहगाई भत्ते और मंहगाई राहत के सम्बन्ध में आदेश -डीए और डीआर की नई किस्तें अब जुलाई 2021 से

राज्य कर्मचारियों, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं तथा शहरी स्थानीय निकायों के कर्मचारियों और कार्य प्रभारित कर्मचारियों को एक जनवरी 2020, एक जुवाई 2020 तथा एक जनवरी 2021 से देय महंगाई भत्ते की किस्त भुगतान नहीं किया जाएगा। इसी तरह राज्य सरकार के पेंशनरों, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं तथा प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के पेंशनरों को इन तीनों अवधि में महंगाई राहत की अतिरिक्त किस्तों का भुगतान नहीं किया जाएगा। इस अवधि में मौजूदा दर से महंगाई भत्ता और महंगाई राहत का भुगतान किया जाता रहेगा। एक जुलाई 2021 से देय महंगाई भत्ता और महंगाई राहत की किस्तों को जारी करने का निर्णय लिए जाने पर उपरोक्त तीनों महंगाई भत्ता और महंगाई राहत की किस्तों की दरों को सरकार बहाल करेगी। इस दर को एक जुलाई 2021 से प्रभावी होने वाले संशोधित दर में शामिल किया जाएगा। यह भी स्पष्ट किया गया है कि एक जनरी 2020 से 30 जून 2021 तक की अवधि का कोई बकाया नहीं दिया जाएगा।
वित्‍त विभाग
वित्‍त (वेतन आयोग) अनुभाग-1
2/2020/वे00-1-314/दस-2020 दिनांक 24/04/2020
मंहगाई भत्ते और मंहगाई राहत के सम्बन्ध में आदेश -




आदेश : Pdf देखे

कतिपय भत्तों /विशेष भत्तों स्थगित रखे जाने के सम्बन्ध में आदेश -एक साल के लिए सीसीए सहित छह भत्तों पर भी रोक

इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने नगर प्रतिकर भत्ता, सचिवालय भत्ता के भुगतान पर भी रोक लगा दिया है। इसके अलावा पुलिस विभाग की अपराध शाखा, सीबीसीआईडी, आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग, सतर्कता अधिष्ठान-अभिसूचना विभाग, सुरक्षा शाखा तथा विशेष जांच शाखा में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों मिलने वाले विशेष वेतन, अवर अभियंताओं को मिलने वाले विशेष भत्ता, पीडब्ल्यूडी में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को मिलने वाले रिसर्च भत्ता, अर्दली भत्ता तथा डिजाइन भत्ता और सिंचाई विभाग में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए अनुमन्य आईएंडपी तथा अर्दली भत्ता को स्थगित कर दिया है। ये भत्ते एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक की अवधि के लिए स्थगित किए गए हैं।
वित् विभाग
वित् (सामान्) अनुभाग-1
1/2020/जी-1-17/दस-2020 दिनांक 24/04/2020
कतिपय भत्तों /विशेष भत्तों स्थगित रखे जाने के सम्बन्ध में आदेश -





आदेश : Pdf देखे

Thursday, April 16, 2020

यूपी बोर्ड: 80 प्रतिशत छात्रों के पास न स्मार्ट फोन न मोबाइल, कैसे करेंगे ऑनलाइन पढ़ाई


लॉकडाउन के बीच माध्यमिक शिक्षा परिषद ने भी यूपी बोर्ड के स्कूलों को छात्रों की ऑनलाइन क्लासेज शुरू करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन यूपी बोर्ड के अधिकांश स्कूलों के छात्रों के पास स्मार्ट फोन है और ही इंटरनेट की सुविधा। एक अनुमान के मुताबिक करीब 80 फीसदी छात्र स्मार्ट फोन और इंटरनेट सेवा का इस्तेमाल नहीं करते हैं। ऐसे में बोर्ड की ओर से लगने वाली वर्चुअल क्लासेज का छात्रों को कोई फायदा नजर नहीं रहा।
परिषद की ओर से जारी निर्देशों के तहत यूपी बोर्ड के स्कूलों के छात्रों की भी ऑनलाइन पढ़ाई कराई जाएगी। व्हाट्सअप वर्चुअल क्लास के माध्यम से छात्रों की कक्षाएं चलेंगी और असाइनमेंट दिए जाएंगे। प्रधानाचार्यों के व्हाट्सएप ग्रुप पर चर्चा की जाएगी कि रोजाना पाठ्यक्रम के कितने हिस्से पढ़ाने होंगे। 
वहीं, विभाग द्वारा -लेक्चर के वीडियो और -किताबें ग्रुप पर मुहैया कराई जाएंगी। प्रधानाचार्य अपने शिक्षकों के ग्रुप पर उन सभी बातों का निर्देश देंगे और विभाग द्वारा मुहैया कराई गई पाठ्यसामग्री को शेयर करेंगे। शिक्षक अपनी कक्षा के छात्रों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर ऑनलाइन लेक्चर, वीडियो पाठ्यसामग्री आदि मुहैया कराएंगे। शिक्षकों को बाकायदा टाइम टेबल बनाकर पढ़ाना होगा।
छात्रों के पास इंटरनेट है मोबाइल   
स्कूलों की यह सारी कवायदें तभी सफल हो पाएंगी जब अधिक से अधिक छात्रों को ऑनलाइन जोड़ा जाएगा। फिलहाल यूपी बोर्ड के 80 प्रतिशत छात्रों के पास स्मार्ट फोन है और इंटरनेट कनेक्शन। यूपी बोर्ड के स्कूलों में अधिकांश वो छात्र पढ़ते हैं जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती। 
खासकर राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में। इन विद्यालयों के अधिकांश छात्रों के परिवार में महज एक ही फोन है वह भी कीपैड वाला। राजकीय कन्या इंटर कॉलेजों की 95 फीसदी से ज्यादा छात्राओं के पास अपना मोबाइल नहीं है। केवल शहरी क्षेत्र में इक्के-दुक्के स्कूल यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं, जिनमें अध्ययनरत छात्रों की आर्थिक स्थिति सामान्य है। 
सबसे अधिक छात्र ग्रामीण इलाकों से 
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री डॉ. आरपी मिश्र ने बताया कि यूपी बोर्ड के अधिकांश छात्र आर्थिक रूप से कमजोर हैं। 80 प्रतिशत से ज्यादा छात्रों के पास तो इंटरनेट है ही मोबाइल। यूपी बोर्ड के स्कूलों में सबसे ज्यादा छात्र संख्या ग्रामीण इलाकों की होती है। वहां इंटरनेट की कनेक्टिविटी भी बहुत खराब है। ऐसे में उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई का लाभ नहीं मिलेगा। 
संघ ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र  


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विधान परिषद के नेता शिक्षक दल ओम प्रकाश शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को पत्र लिखकर ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था से सामान्य एवं निर्धन परिवार के बच्चों को वर्चुअल क्लासेज से वंचित होने से बचाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा के लिए लैपटॉप या उच्च श्रेणी का मोबाइल और तेज इंटरनेट सेवा की आवश्यकता है, जिसका अभाव छात्रों में तो है ही वहीं कई यूपी बोर्ड के शिक्षकों में भी है। ऐसी स्थिति में अनेक परिवार ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था से वंचित रहेंगे।