अब प्रदेश के
हर विकास खंड (ब्लाक) में दो मॉडल स्कूल खोले जाएंगे। प्रदेश के शिक्षा निदेशक
बेसिक ने सभी बीएसए को पत्र भेजकर उनसे हर विकास खंड (ब्लाक) के दो परिषदीय
प्राथमिक विद्यालयों, एक अंग्रेजी और एक हिंदी माध्यम को मॉडल स्कूल के रूप में
विकसित करने का निर्देश दिया है। मॉडल स्कूल में बच्चों के लिए डिजिटल क्लास रूम, व्हाइट बोर्ड, साइंस, मैथ, लैंग्वेज लैब के
जरिए पढ़ाई करेंगे। बीएसए को भेजे पत्र में कहा गया कि मॉडल स्कूल इस प्रकार के
हों कि वह विकास खंड के दूसरे विद्यालयों के लिए उदाहरण साबित हो सकें। इन
विद्यालयों से प्रेरणा लेकर अन्य विद्यालयों को विकसित होने के लिए प्रोत्साहन
प्राप्त हो।
मॉडल स्कूल के
रूप में विकसित करने के लिए प्रत्येक परिषदीय स्कूलों को 23.50 लाख रुपये का
बजट आवंटित किया गया है। मॉडल स्कूल लिए आवंटित बजट में स्कूल में बाउंड्रीवाल
बनाई जाएगी। विद्यालय में अलग से शौचालय-मूत्रालय की व्यवस्था की जाएगी। विद्यालय
परिसर में टाइल्स और कोटा स्टोन लगाया जाएगा। स्कूल में स्टॉफ एवं बच्चों के लिए
फर्नीचर की व्यवस्था की जाएगी। विद्यालय में 10 केवीए का एक सोलर सिस्टम लगाया जाएगा। मॉडल
स्कूल में पुस्तकालय और साइंस, डिजिटल क्लास रूम, व्हाइट बोर्ड, विद्यालय भवन में
लर्निंग ऐड के लिए अलग से कक्ष, रनिंग वाटर सुविधा की व्यवस्था, खेल सामग्री, माइक सिस्टम, ड्रम सिस्टम, वाटर कूलर, झूले, शैक्षिक खिलौने, साइंस, मैथ, लैंग्वेज लैब, अग्निशमन यंत्र की
व्यवस्था की जाएगी। निदेशक की ओर से भेजे पत्र में कहा गया है कि इस संबंध में सभी
जिलों के बीएसए से इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। निदेशक की ओर
से भेजे पत्र में कहा गया है कि हाल के कुछ वर्षों में परिषदीय स्कूलों के भौतिक
परिवेश में आए बदलाव और सुविधाएं बढ़ाए जाने के बाद अभिभावकों का रुझान बेसिक
शिक्षा परिषद से जुड़े स्कूलों में बढ़ा है।
