Wednesday, January 15, 2014

स्कूलों के प्रदर्शन पर बनेंगे राष्ट्रीय मानक

नई दिल्ली (एसएनबी)। शिक्षा के अधिकार कानून को सफल बनाने के लिए सरकार छात्रों और उनके अभिभावकों को उचित जानकारी देने के लिए स्कूलों के प्रदर्शन पर राष्ट्रीय मानक तैयार करने पर विचार कर रही है। शिक्षा के अधिकार कानून के तीन साल पूरा होने पर आयोजित समापन कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री शशि थरूर को आना था, लेकिन वे नहीं आ सके। कार्यक्रम में कृष्णा तीरथ ने कहा कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को स्कूलों के बाहर मौजूद बच्चों की भी निगरानी करनी चाहिए। कार्यक्रम में मानव संसाधन विकास मंत्रालय की एक वरिष्ठ अधिकारी वृंदा स्वरूप ने कहा कि स्कूलों के प्रदर्शन पर राष्ट्रीय मानक तैयार करने से जो स्कूल बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं या बेहतर प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं, उनकी जानकारी सामने आएगी। इस पहल से अभिभावकों को काफी फायदा होगा। इस अवसर पर शिक्षा एवं साक्षरता सचिव आर. भट्टाचार्य ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत राज्यों को तय मानकों को पूरा करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि आवासीय विद्यालय और प्राथमिक शिक्षा को मुहैया कराने के लिए परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार की ओर से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं। सरकार की ओर से तय किए गए मानकों के अनुरूप शिक्षक नहीं उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इसके लिए कुछ राज्यों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नियम और शर्तों में उदार बनाने की मांग की है। शिक्षा के अधिकार कानून के तीन साल पूरा होने पर समापन कार्यक्रम में छह से 14 साल के बच्चों को मुफ्त और प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने के विषय पर विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इसका आयोजन राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) और यूनिसेफ ने संयुक्त रूप से किया था। इसमें बीते तीन वर्षों के दौरान शिक्षा के अधिकार कानून की प्रगति और राज्यों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया। शिक्षा के अधिकार कानून के तीन साल पूरा होने पर समापन कार्यक्रम मानक तैयार करने के लिए गंभीरता से विचार कर रही है सरकार कुछ राज्यों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नियम और शर्तों में उदार बनाने की मांग की