Tuesday, December 17, 2013


1.63 लाख शिक्षा मित्र बनेंगे सहायक शिक्षक

सोमवार, 16 दिसंबर 2013 लखनऊ Updated @ 10:16 PM IST

 
प्रदेश की सपा सरकार ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर शिक्षकों का दामन सौगातों से भरने की तैयारी कर
 ली है।

माध्यमिक शिक्षा परिषद के सहायता प्राप्त स्कूलों में सालों से कार्यरत 2448 तदर्थ शिक्षकों और प्राइमरी
स्कूलों में लगे 1.63 लाख शिक्षा मित्रों को शिक्षक पद पर नियमित करने पर सहमति हो गई है।

प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री राकेश कुमार गर्ग की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में इस मसले पर
विचार किया गया।

उम्मीद की जा रही है कि बुधवार को राजधानी में आयोजित शिक्षकों की रैली में मुख्यमंत्री अखिलेश
यादव खुद ही इसकी घोषणा करेंगे।

मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव राकेश कुमार गर्ग ने सोमवार को विभाग के मंत्रियों और अधिकारियों की
बैठक बुलाई थी।

इसमें बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी, राज्य मंत्री योगेश प्रताप सिंह, प्रमुख सचिव वित्त आनंद
 मिश्रा, प्रमुख सचिव कार्मिक राजीव कुमार, प्रमुख सचिव समाज कल्याण सुनील कुमार, सचिव
माध्यमिक शिक्षा जितेंद्र कुमार व सचिव बेसिक शिक्षा नीतीश्वर कुमार शामिल हुए।

इसमें 8 अगस्त 1993 से 30 दिसंबर 2000 तक माध्यमिक शिक्षा परिषद से सहायता प्राप्त स्कूलों में
रखे गए 2448 तदर्थ शिक्षकों तथा प्राइमरी स्कूलों में कार्यरत 1.63 लाख शिक्षा मित्रों को शिक्षक पद पर
 नियमित करने पर लगभग सहमति बन गई है।

माध्यमिक शिक्षा परिषद से निर्धारित वेतनमान तदर्थ शिक्षकों को दिया जा रहा है, बस केवल इन्हें
नियमित किया जाना है। इनके नियमितीकरण पर सरकार को कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं आएगा।

इसी तरह वर्ष 2000 से प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षा मित्रों को भी नियमित कर
सहायक अध्यापक का वेतनमान देने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई है।

ये शिक्षा मित्र पैरा टीचर की श्रेणी में आते हैं और इन्हें फिलहाल 3500 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जा
 रहा है।

सरकार का मानना है कि चूंकि यह पहले से ही शिक्षक की श्रेणी में आते हैं और बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
इसलिए इन्हें नियमित करने में टीईटी आड़े नहीं आएगी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने नए 

शिक्षकोंको रखने पर टीईटी अनिवार्य किया है।

साभार अमरउजाला